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BJP and Congress workers clash on the streets after an 80-minute debate... Baghel and Vijay Sharma lock horns over housing data.
रायपुर। छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर चल रही सियासी बहस मंगलवार को रायपुर प्रेस क्लब में आमने-सामने की बहस तक पहुंच गई। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने करीब 80 मिनट तक योजना के स्वीकृत और पूर्ण आवासों के आंकड़ों को लेकर अपना-अपना पक्ष रखा। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे के दावों पर सवाल उठाए और अपने कार्यकाल से जुड़े आंकड़े सामने रखे।बहस खत्म होने के बाद मामला प्रेस क्लब परिसर से बाहर भी पहुंच गया। भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की और झड़प की स्थिति बनी। पुलिस ने हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित किया। घटना में एक पुलिसकर्मी की वर्दी का बैज और बटन टूटने की जानकारी भी सामने आई है।
बहस के दौरान भूपेश बघेल ने दावा किया कि उनकी सरकार के समय करीब सात लाख आवास स्वीकृत किए गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि कोरोना काल में केंद्र से राशि नहीं मिलने और PM आवास योजना का पोर्टल बंद होने से योजना प्रभावित हुई।बघेल ने यह भी कहा कि उनकी सरकार ने सामाजिक-आर्थिक सर्वे के आधार पर पात्र परिवारों की पहचान कर आवास देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई थी। उनके अनुसार, वर्तमान सरकार पुराने स्वीकृत आवासों और अलग-अलग सूचियों के आंकड़ों को जोड़कर अपनी उपलब्धि के तौर पर प्रस्तुत कर रही है।
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना का पोर्टल बंद नहीं था और कोरोना काल में भी केंद्र से योजना के लिए राशि मिलती रही। उन्होंने कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में स्वीकृत और पूर्ण आवासों के आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए भाजपा सरकार के दौरान हुई प्रगति का उल्लेख किया।शर्मा ने दावा किया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में बड़ी संख्या में नए आवास स्वीकृत किए गए और निर्माण भी हुआ। उन्होंने वित्तीय वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ में बड़ी संख्या में PM आवास पूर्ण होने का दावा किया।
बहस का एक प्रमुख मुद्दा छत्तीसगढ़ के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत तय आवासों की संख्या रहा। दोनों पक्षों ने स्वीकृति, निर्माण और अलग-अलग वर्षों में जारी लक्ष्यों को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने रखे।भूपेश बघेल ने सवाल उठाया कि सरकार की ओर से बताए जा रहे कुल आंकड़ों में पुराने लक्ष्य और पूर्व में स्वीकृत आवासों को किस तरह शामिल किया गया है। वहीं विजय शर्मा ने योजना के पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों को आधार बताते हुए सरकार के कार्यकाल में हुए निर्माण का पक्ष रखा।इस तरह विवाद केवल कुल मकानों की संख्या तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह भी मुद्दा बना कि स्वीकृत आवास, पूर्ण आवास और अलग-अलग चरणों में मिली मंजूरी को कुल उपलब्धि में किस तरह गिना जाए।
प्रेस क्लब में बहस खत्म होने के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच इंटरनेट मीडिया पर भी बयानबाजी तेज हो गई। दोनों दलों की ओर से पोस्टर और राजनीतिक टिप्पणियों के जरिए एक-दूसरे पर निशाना साधा गया।भाजपा की ओर से बघेल पर निशाना साधते हुए पोस्टर जारी किए गए, जबकि बघेल ने भी इंटरनेट मीडिया पर विजय शर्मा की शैली और बहस को लेकर पलटवार किया। दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच यह विवाद ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी चर्चा का विषय बना रहा।
बहस के दौरान अंदर नेताओं के बीच आंकड़ों को लेकर तीखी बातचीत चल रही थी, वहीं बाहर दोनों दलों के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। कहासुनी के बाद धक्का-मुक्की की स्थिति बनी और पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक पुलिसकर्मियों के साथ भी कार्यकर्ताओं की झड़प हुई।इस पूरे घटनाक्रम ने PM आवास योजना से जुड़े आंकड़ों की राजनीतिक बहस को और गरमा दिया है। हालांकि, दोनों नेताओं द्वारा पेश किए गए आंकड़ों की अलग-अलग व्याख्या के बीच योजना के आधिकारिक आंकड़ों और उनकी गणना की पद्धति को देखना इस विवाद को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।