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Bastar's service warriors receive Padma Shri, national honour for Godbole couple and Budhari Tati
जगदलपुर। बस्तर अंचल से एक बार फिर गर्व का क्षण सामने आया है, जहां नक्सल प्रभावित और दुर्गम जनजातीय क्षेत्रों में वर्षों तक सेवा देने वाले तीन जनसेवकों को पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया है। इनमें चिकित्सक दंपती डॉक्टर रामचंद्र त्र्यंबक गोडबोले और डॉक्टर सुनीता गोडबोले के साथ सामाजिक कार्यकर्ता बुधरी ताती शामिल हैं।
राष्ट्रपति भवन में मिला सम्मान, दशकों की सेवा को मिली राष्ट्रीय पहचान
राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में इन सभी को पद्मश्री से सम्मानित किया गया। यह सम्मान 26 जनवरी की पूर्व संध्या पर घोषित किया गया था और अब उन्हें औपचारिक रूप से प्रदान किया गया।यह सम्मान केवल व्यक्तियों का नहीं, बल्कि उस पूरे बस्तर अंचल का सम्मान माना जा रहा है जहां सीमित संसाधनों के बीच भी सेवा और समर्पण की मिसाल कायम की गई।
अबूझमाड़ में तीन दशक की सेवा, कठिन परिस्थितियों में निभाई जिम्मेदारी
डॉक्टर रामचंद्र त्र्यंबक गोडबोले और डॉक्टर सुनीता गोडबोले ने अबूझमाड़ जैसे बेहद दुर्गम और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में दशकों तक स्वास्थ्य सेवाएं दीं।यह क्षेत्र लंबे समय तक स्वास्थ्य सुविधाओं और बुनियादी संसाधनों से वंचित रहा, लेकिन इसके बावजूद गोडबोले दंपती ने यहां रहकर ग्रामीणों का इलाज किया और स्वास्थ्य जागरूकता फैलाने का काम किया।
बुधरी ताती का योगदान, सामाजिक सेवा में मिसाल
सामाजिक कार्यकर्ता बुधरी ताती ने भी जनजातीय क्षेत्रों में सामाजिक विकास और जागरूकता के लिए लगातार कार्य किया है। उनके प्रयासों को भी राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है।
राष्ट्रपति ने किया सम्मानित, देशभर की 66 हस्तियों को मिला पद्म सम्मान
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने इस अवसर पर कुल 66 हस्तियों को पद्म पुरस्कार प्रदान किए। इनमें पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्मश्री सम्मान शामिल रहे।समारोह में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए विशिष्ट व्यक्तित्वों को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
धर्मेंद्र को मरणोपरांत पद्म विभूषण, हेमा मालिनी ने ग्रहण किया सम्मान
इस समारोह में दिवंगत फिल्म अभिनेता धर्मेंद्र को मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनकी पत्नी और सांसद हेमा मालिनी ने ग्रहण किया।
बस्तर की मिट्टी से निकली सेवा की गूंज, राष्ट्रीय मंच पर मिली पहचान
बस्तर जैसे कठिन क्षेत्रों में वर्षों तक बिना किसी स्वार्थ के सेवा करने वाले इन जनसेवकों को मिला यह सम्मान इस बात का प्रमाण है कि सच्ची सेवा और समर्पण को हमेशा राष्ट्रीय पहचान मिलती है।