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Big attack on secret network of Maoists in Bastar, security forces engaged in search of hidden treasure worth Rs 200 crores
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में माओवादी संगठन के आर्थिक और हथियार तंत्र को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए सुरक्षाबलों ने एक विशेष अभियान शुरू किया है। "ऑपरेशन खजाना" नाम से चलाए जा रहे इस अभियान के तहत जंगलों में जमीन के भीतर छिपाकर रखे गए हथियारों, विस्फोटकों और नकदी की तलाश की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार इन गुप्त भंडारों की अनुमानित कीमत करीब 200 करोड़ रुपये हो सकती है।
अत्याधुनिक तकनीक से खोजे जा रहे गुप्त ठिकाने
सुरक्षाबल इस अभियान में आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग कर रहे हैं। संदिग्ध क्षेत्रों की पहचान के लिए उपग्रह निगरानी, ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार, ड्रोन और डीप मेटल डिटेक्टर जैसे उपकरणों की सहायता ली जा रही है। घने जंगलों और दुर्गम इलाकों में छिपे ठिकानों का पता लगाने के लिए विशेष तकनीकी विश्लेषण भी किया जा रहा है।अधिकारियों का कहना है कि पिछले तीन महीनों के दौरान ही अभियान के तहत आठ करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के हथियार, गोला-बारूद और नकदी बरामद की जा चुकी है, जिससे माओवादियों के नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है।
सरेंडर माओवादी से मिले अहम सुराग
जांच के दौरान आत्मसमर्पण कर चुके एक वरिष्ठ माओवादी के मोबाइल फोन से कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। पुलिस ने उससे जुड़ी 22 संदिग्ध लोकेशनों की पहचान की है, जहां हथियार और नकदी छिपाकर रखे जाने की आशंका है। इन सूचनाओं के आधार पर विभिन्न इलाकों में लगातार तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।
माओवादियों की तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था का खुलासा
सुरक्षाबलों की जांच में माओवादियों द्वारा अपनाई गई विशेष डंपिंग प्रणाली का भी खुलासा हुआ है।
पहली परत: ऊपर की सतह पर मिट्टी और कांटेदार झाड़ियां बिछाई जाती थीं ताकि किसी को संदेह न हो।
दूसरी परत: इसके नीचे आईईडी और अन्य विस्फोटक लगाए जाते थे, जिससे खोजबीन करने वालों को नुकसान पहुंचाया जा सके।
तीसरी परत: सबसे नीचे जलरोधी पैकेजिंग में हथियार, कारतूस और नकदी सुरक्षित रखी जाती थी।
आर्थिक और हथियार तंत्र को खत्म करने की रणनीति
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि माओवादी संगठन अपनी अवैध वसूली और लेवी की बड़ी राशि को नकदी और हथियारों के रूप में जमीन में छिपाकर रखता था। अब अभियान का उद्देश्य केवल माओवादियों की गतिविधियों पर अंकुश लगाना नहीं, बल्कि उनके आर्थिक संसाधनों और हथियार आपूर्ति तंत्र को भी पूरी तरह समाप्त करना है।
अभियान रहेगा जारी
सुरक्षाबलों ने स्पष्ट किया है कि जंगलों में छिपाए गए हथियारों, विस्फोटकों और नकदी की पूरी बरामदगी तक अभियान जारी रहेगा। अधिकारियों का कहना है कि बस्तर में माओवादी ढांचे को जड़ से खत्म करने के लिए यह निर्णायक कार्रवाई साबित हो सकती है। अब लक्ष्य केवल सक्रिय माओवादियों पर कार्रवाई नहीं, बल्कि उनके पूरे नेटवर्क को समाप्त करना है।