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Bulldozer action in Nakti: 85 houses razed, hundreds of families left homeless; government and opposition at loggerheads.
रायपुर। राजधानी से लगे सम्मानपुर-नकटी गांव में प्रशासन की बड़ी बुलडोजर कार्रवाई के दौरान 85 मकानों को ध्वस्त कर दिया गया। करीब चार घंटे के अल्टीमेटम के बाद शुरू हुई कार्रवाई में सैकड़ों परिवार बेघर हो गए। अपने आशियाने को बचाने की गुहार लगाते ग्रामीणों की आंखों में आंसू थे, जबकि दोपहर तक वे अपने टूटे घरों से सामान समेटते नजर आए। शाम होते-होते गांव का बड़ा हिस्सा खाली हो चुका था और लोग सामान के साथ नई जगह जाने के इंतजार में बैठे रहे।यह जमीन राजधानी के एयरपोर्ट के समीप प्रस्तावित विधायक आवास परियोजना के लिए खाली कराई गई है। कार्रवाई से पहले प्रशासन ने आधी रात से ही पूरे गांव को सुरक्षा घेरे में ले लिया था।
रायपुर जिला प्रशासन ने बयान जारी कर कहा कि धरसींवा विकासखंड के सम्मानपुर (नकटी) में लगभग 9 हेक्टेयर शासकीय भूमि पर किए गए अवैध कब्जे हटाए गए। प्रशासन के अनुसार राजस्व, पुलिस और नगर निगम की संयुक्त टीम ने 77 अवैध मकानों को हटाया।प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई से पहले सभी कब्जाधारियों को नियमानुसार नोटिस और अंतिम सूचना दी गई थी। प्रभावित परिवारों को नवा रायपुर के सेक्टर-30 स्थित आवासों में बसाने की व्यवस्था की गई है। वहां भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधा, एंबुलेंस, चिकित्सकों की टीम और सामान ढोने के लिए मालवाहक वाहन उपलब्ध कराए गए हैं। सामान की सुरक्षा के लिए कोटवारों की भी तैनाती की गई है।
कार्रवाई के बाद कांग्रेस ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि गरीबों के घर उजाड़कर विधायकों के आवास बनाना बेहद अमानवीय कदम है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सरकार गरीबों पर प्रहार कर रही है और इस कार्रवाई का कांग्रेस विरोध करती है।
धरसींवा विधायक अनुज शर्मा ने वीडियो संदेश जारी कर कहा कि सरकार किसी भी जरूरतमंद के साथ अन्याय नहीं होने देगी। उनके मुताबिक प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की पूरी व्यवस्था की जा रही है और इस संबंध में पहले भी ग्रामीणों से चर्चा की गई थी।
सूत्रों के अनुसार गांव खाली कराने की तैयारी रविवार देर रात शुरू हुई। तड़के करीब तीन बजे रायपुर के अलावा बलौदाबाजार, धमतरी, महासमुंद और गरियाबंद से भी पुलिस बल बुलाया गया। ई-कंपनी, रिजर्व बल, पीएचक्यू की विभिन्न वाहिनियों और महिला पुलिस समेत कुल 3,377 जवान कार्रवाई में तैनात रहे। एहतियात के तौर पर आंसू गैस दस्ते भी मौके पर मौजूद थे।
ग्रामीणों का दावा है कि बुलडोजर कार्रवाई में लगभग 18 प्रधानमंत्री आवास भी ध्वस्त कर दिए गए। सेवती पाल नामक महिला ने बताया कि छह महीने पहले ही प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उनका घर बना था और उस पर अभी भी कर्ज बाकी है, लेकिन अब वह भी तोड़ दिया गया।कई परिवारों ने यह भी सवाल उठाया कि यदि जमीन पर बने मकानों को अवैध माना गया, तो फिर उन्हीं मकानों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृति कैसे मिली। वहीं कुछ ग्रामीणों ने पुनर्वास को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि एक परिवार के कई विवाहित सदस्य होने के बावजूद केवल एक आवास मिलने से भविष्य में रहने की समस्या खड़ी होगी।
बुलडोजर कार्रवाई के बाद जहां प्रशासन पुनर्वास व्यवस्था को पर्याप्त बता रहा है, वहीं प्रभावित परिवार और विपक्ष कई सवाल उठा रहे हैं। खासकर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने मकानों के ध्वस्तीकरण और उनके अनुमोदन की प्रक्रिया को लेकर जवाबदेही की मांग तेज हो गई है। अब इस पूरे मामले पर प्रशासन और सरकार के अगले कदम पर सबकी नजर रहेगी।