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Bustle in Parliament over several key bills... politics heats up over issues ranging from birth and death certificates to 'Vande Mataram' and the paper leak law.
नई दिल्ली। मानसून सत्र के दौरान संसद में कई महत्वपूर्ण विधेयकों, तीखी राजनीतिक बहस और आरोप-प्रत्यारोप के नाम रहा। केंद्र सरकार ने जहां जन्म और मृत्यु पंजीकरण प्रक्रिया को सख्त बनाने, राष्ट्रगीत वंदे मातरम के सम्मान को कानूनी सुरक्षा देने और पेपर लीक पर कड़ा शिकंजा कसने की दिशा में कदम बढ़ाए, वहीं विपक्ष और सरकार के बीच तीखा टकराव भी देखने को मिला।
केंद्र सरकार ने लोकसभा में 'जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026' पेश किया है। गृह मंत्रालय की ओर से लाए गए इस विधेयक का उद्देश्य फर्जी जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्रों पर रोक लगाना और पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना है।प्रस्तावित संशोधन के अनुसार यदि जन्म या मृत्यु के एक से दो वर्ष बाद पंजीकरण कराया जाता है, तो इसके लिए जिला कलेक्टर, एसडीएम या अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अनुमति लेना अनिवार्य होगा। वहीं दो वर्ष से अधिक की देरी होने पर प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट की मंजूरी के बाद ही पंजीकरण संभव हो सकेगा।सरकार का मानना है कि इससे फर्जी दस्तावेजों के जरिए पहचान संबंधी धोखाधड़ी और अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।
राष्ट्रगीत वंदे मातरम के सम्मान और संरक्षण से जुड़ा विधेयक राज्यसभा से पारित हो गया है। इस कानून के तहत अब जानबूझकर वंदे मातरम के गायन में बाधा डालना या लोगों को इसे गाने से रोकना दंडनीय अपराध माना जाएगा।प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार दोषी पाए जाने पर तीन वर्ष तक की सजा हो सकती है। सरकार का कहना है कि यह विधेयक राष्ट्रगान जन-गण-मन की तरह राष्ट्रगीत को भी सम्मानजनक कानूनी सुरक्षा प्रदान करेगा।हालांकि इस मुद्दे पर विपक्ष ने विरोध दर्ज कराया और चर्चा के दौरान हंगामे के बाद सदन से वाकआउट कर दिया। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने आरोप लगाया कि कांग्रेस का वंदे मातरम को लेकर विरोध का इतिहास रहा है और उसका रुख आज भी नहीं बदला है।
सरकार ने सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल रोकने के लिए 2024 में बने कानून को और मजबूत बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक पर लंबी चर्चा के बाद इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।सरकार का कहना है कि संशोधन का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करना और युवाओं के भविष्य के साथ होने वाले खिलवाड़ को रोकना है।
पेपर लीक विधेयक पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह पर छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप लगाए। राहुल गांधी ने दावा किया कि छात्रों पर बल प्रयोग और गोलीबारी जैसी घटनाओं की जिम्मेदारी गृह मंत्रालय की है।उनके बयान के बाद लोकसभा में जोरदार हंगामा शुरू हो गया। सत्ता पक्ष ने आरोपों को निराधार बताते हुए राहुल गांधी से माफी की मांग की।
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कहीं भी गोली चलने की पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी परिस्थितियों में कार्रवाई का आदेश मंत्री नहीं बल्कि संबंधित मजिस्ट्रेट देता है।लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी कहा कि राहुल गांधी का माइक बंद नहीं किया गया था और उन्हें अपनी बात रखने का पूरा अवसर दिया गया था, लेकिन बिना सबूत गंभीर आरोप लगाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
छात्र प्रदर्शन से जुड़े मामले में दिल्ली पुलिस ने भी सोशल मीडिया पर वायरल गोली लगने के दावों को गलत बताया है। पुलिस के अनुसार घायल छात्र की मेडिकल रिपोर्ट में गोली लगने का कोई प्रमाण नहीं मिला। जांच में केवल सामान्य चोट का उल्लेख किया गया है।
मानसून सत्र के शुरुआती दिनों में लगातार गतिरोध और हंगामे के बाद अब सरकार विधायी एजेंडे को तेजी से आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। सरकार का लक्ष्य सत्र में सूचीबद्ध सभी प्रमुख विधेयकों को पारित कराना है। बुधवार को कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर हुई कार्रवाई को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
जन्म-मृत्यु पंजीकरण प्रक्रिया को सख्त बनाने, राष्ट्रगीत को कानूनी संरक्षण देने और पेपर लीक पर कड़ी कार्रवाई जैसे मुद्दों ने संसद के भीतर व्यापक बहस को जन्म दिया है। आने वाले दिनों में इन विधेयकों और उनसे जुड़े राजनीतिक विवादों पर देश की नजर बनी रहेगी।