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CG Assembly: House heats up over Vedanta accident; Opposition creates a ruckus demanding Anil Agarwal's arrest and stages a walkout, dissatisfied with the response.
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन प्रश्नकाल के दौरान औद्योगिक दुर्घटनाओं का मुद्दा जोरदार तरीके से गूंजा। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सक्ती स्थित वेदांता पावर प्लांट हादसे का मामला उठाते हुए कंपनी के निदेशक अनिल अग्रवाल की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ की गई कार्रवाई पर सरकार से जवाब मांगा। उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने सदन से बहिर्गमन (वॉकआउट) कर दिया।
प्रश्नकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने पिछले दो वर्षों में हुई औद्योगिक दुर्घटनाओं की जानकारी मांगते हुए कहा कि सरकार द्वारा दिए गए परिशिष्ट में कई हादसों का कारण सेफ्टी ऑडिट में कमी बताया गया है। उन्होंने पूछा कि ऐसे मामलों में संबंधित उद्योगों को नोटिस दिए गए या नहीं और सेफ्टी ऑडिट कितने अंतराल में कराया जाना अनिवार्य है।
उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने जवाब देते हुए बताया कि खतरनाक रसायनों के निर्माण, भंडारण और संचालन से जुड़े नियमों के तहत मान्यता प्राप्त एजेंसियों से समय-समय पर सेफ्टी ऑडिट कराया जाता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के 32 कारखानों में सेफ्टी ऑडिट कराया जा चुका है और जहां ऑडिट नहीं हुआ है, वहां नियमानुसार कार्रवाई का प्रावधान है।
डॉ. महंत ने सक्ती स्थित वेदांता पावर प्लांट हादसे का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इतने बड़े हादसे में केवल दो लोगों को आरोपी बनाया गया है। इस पर मंत्री ने बताया कि अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है और श्रम विभाग की ओर से श्रम न्यायालय में भी मामला दायर किया गया है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जब पुलिस दस्तावेजों में अनिल अग्रवाल का नाम दर्ज है, तो उनकी गिरफ्तारी के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। मंत्री ने जवाब दिया कि पुलिस निष्पक्ष और गंभीरता से जांच कर रही है तथा जल्द ही आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
विधायक राम कुमार यादव ने कहा कि हादसे के प्रभावित मजदूरों और उनके परिजनों को सरकार और केंद्र द्वारा घोषित आर्थिक सहायता अब तक पूरी तरह नहीं मिली है। इस पर उद्योग मंत्री ने बताया कि कंपनी ने मृतकों के आश्रितों को 35-35 लाख रुपये का मुआवजा दिया है। इसके अलावा मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार 5 लाख रुपये और केंद्र सरकार की ओर से 2 लाख रुपये की सहायता प्रदान किए जाने की प्रक्रिया जारी है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि जब अनिल अग्रवाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी, तब लगा था कि सरकार मामले को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने सवाल किया कि क्या भविष्य में भी औद्योगिक दुर्घटनाओं में जिम्मेदार निदेशकों के खिलाफ इसी तरह एफआईआर दर्ज की जाएगी या यह कार्रवाई केवल इसी मामले तक सीमित रहेगी।
पूरे मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और विधायक अजय चंद्राकर के बीच तीखी बहस भी हुई। भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि क्या केवल दबाव बनाने के उद्देश्य से अनिल अग्रवाल के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है और अन्य जिम्मेदार लोगों को बचाने का प्रयास हो रहा है। उद्योग मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने सदन से बहिर्गमन कर सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया।