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CM Vishnudeo Sai made a big demand from the Red Fort, saying that those who abandon their original traditions should be considered for exclusion from the ST list.
रायपुर। देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला मैदान में आयोजित ‘राष्ट्रीय जनजाति सांस्कृतिक समागम’ के दौरान छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जनजातीय पहचान और आरक्षण व्यवस्था को लेकर बड़ा बयान दिया। भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष पर आयोजित इस कार्यक्रम में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की मौजूदगी में मुख्यमंत्री साय ने ‘डी-लिस्टिंग’ की मांग का खुलकर समर्थन किया।उन्होंने कहा कि समाज के भीतर लगातार यह भावना मजबूत हो रही है कि जो लोग अपनी मूल जनजातीय संस्कृति, परंपरा और धर्म को छोड़ चुके हैं, उन्हें अनुसूचित जनजाति सूची से बाहर किए जाने पर गंभीरता से विचार होना चाहिए।
‘असल हकदारों तक पहुंचे आरक्षण का लाभ’
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आज भी कई जनजातीय समुदाय कठिन परिस्थितियों में अपनी पारंपरिक पहचान और संस्कृति को बचाकर रखे हुए हैं। ऐसे समुदायों तक सरकारी योजनाओं और आरक्षण का वास्तविक लाभ पहुंचना चाहिए।उन्होंने कहा कि डी-लिस्टिंग पर चर्चा इसलिए जरूरी है ताकि जनजातीय समाज की मूल अस्मिता सुरक्षित रह सके और उन लोगों को प्राथमिकता मिले, जो अब भी अपनी लोक परंपराओं और सामाजिक मूल्यों से जुड़े हुए हैं।
अमित शाह की मौजूदगी में उठा संवेदनशील मुद्दा
जनजाति सुरक्षा मंच और जनजाति जागृति समिति की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए। इस दौरान देशभर से बड़ी संख्या में जनजातीय प्रतिनिधि और सामाजिक संगठनों के लोग मौजूद रहे।कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय ने जनजातीय समाज की सांस्कृतिक विरासत, जीवनशैली और प्रकृति संरक्षण में उनकी भूमिका को भी प्रमुखता से रखा।
‘पर्यावरण संकट का समाधान जनजातीय जीवन दर्शन’
सीएम साय ने अपने संबोधन में कहा कि पूरी दुनिया इस समय पर्यावरण संकट और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों से जूझ रही है। ऐसे समय में जनजातीय समाज का प्रकृति के साथ संतुलित जीवन पूरी मानवता को टिकाऊ विकास का रास्ता दिखा सकता है।उन्होंने कहा कि जनजातीय समुदाय सदियों से जंगल, जल और जमीन के साथ सामंजस्य बनाकर जीवन जीते आए हैं और यही सोच भविष्य के लिए सबसे जरूरी है।
जशपुर में डिलिस्टिंग के विरोध में सड़क पर उतरे ईसाई आदिवासी
इधर, डिलिस्टिंग की मांग को लेकर जशपुरनगर में विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिला। रविवार को बड़ी संख्या में ईसाई आदिवासी समुदाय के लोग सड़कों पर उतर आए और डिलिस्टिंग के खिलाफ रैली निकाली।राजी पड़हा और ईसाई आदिवासी महासभा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस प्रदर्शन में लोग हाथों में बैनर, तख्तियां और छतरियां लेकर शामिल हुए। भीषण गर्मी और 42 डिग्री तापमान के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने शहर के प्रमुख मार्गों पर मार्च निकालते हुए विरोध दर्ज कराया।
‘संविधान देता है धर्म मानने की आजादी’
ईसाई आदिवासी महासभा के प्रदेश अध्यक्ष अनिल किस्पोट्टा ने कहा कि संविधान हर नागरिक को अपनी इच्छा से किसी भी धर्म को मानने की स्वतंत्रता देता है। उन्होंने कहा कि अगर डिलिस्टिंग लागू होती है, तो इसका असर पांचवीं अनुसूची समेत आदिवासी अधिकारों पर भी पड़ सकता है।उन्होंने यह भी बताया कि जशपुर जिले की करीब 24 प्रतिशत आबादी ईसाई समुदाय से जुड़ी हुई है, इसलिए यह मुद्दा यहां बेहद संवेदनशील माना जा रहा है।