

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

Candidates question CGPSC Mains results... Demand raised to call 795 candidates for the interview against 265 posts.
रायपुर। राज्य सेवा मुख्य परीक्षा 2025 के परिणाम जारी होने के बाद छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की चयन और मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों में असंतोष सामने आया है। कई अभ्यर्थी आयोग कार्यालय पहुंचे और मुख्य परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं का दोबारा मूल्यांकन कराने के साथ वर्तमान परिणाम को स्थगित कर नई चयन सूची जारी करने की मांग की।अभ्यर्थियों ने गुरुवार को राज्यपाल, मुख्यमंत्री, लोक सेवा आयोग और नेता प्रतिपक्ष को ज्ञापन भेजकर चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने की मांग रखी है। उनका कहना है कि पुनर्मूल्यांकन से योग्य उम्मीदवारों के साथ संभावित अन्याय की स्थिति दूर हो सकती है।
राज्य सेवा परीक्षा 2025 के तहत 20 अलग-अलग सेवाओं के लिए कुल 265 पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी किया गया था। मुख्य परीक्षा के परिणाम के अनुसार 608 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए चुना गया है।अभ्यर्थियों का दावा है कि निर्धारित अनुपात के अनुसार 265 पदों के मुकाबले कम से कम तीन गुना यानी 795 उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए अवसर मिलना चाहिए। इसी आधार पर उन्होंने मौजूदा चयन सूची पर पुनर्विचार करने और 795 अभ्यर्थियों तक साक्षात्कार का दायरा बढ़ाने की मांग की है।
अभ्यर्थियों ने ज्ञापन में मुख्य परीक्षा के सभी प्रश्नपत्रों की उत्तर पुस्तिकाओं का उदारतापूर्वक पुनर्मूल्यांकन कराने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि प्रश्नपत्रों के कठिनाई स्तर को ध्यान में रखते हुए मूल्यांकन की ऐसी समानुपातिक व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे कठिन प्रश्नपत्रों में योग्य अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम 66 अंक हासिल करना व्यावहारिक रहे।उनका तर्क है कि यदि मूल्यांकन में किसी स्तर पर विसंगति रह गई है तो उसका असर सीधे अभ्यर्थियों की मेरिट और इंटरव्यू के अवसर पर पड़ता है। इसलिए परिणाम को अंतिम रूप देने से पहले उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच जरूरी है।
प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम के आधार पर 3,921 उम्मीदवारों को मुख्य परीक्षा के लिए चुना गया था। राज्य सेवा मुख्य परीक्षा 6 से 9 जून 2026 के बीच आयोजित की गई थी। इसके बाद आयोग ने परिणाम जारी करते हुए 608 उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए पात्र घोषित किया।
अभ्यर्थियों का कहना है कि उनका उद्देश्य आयोग की कार्यप्रणाली पर आरोप लगाना नहीं है। वे केवल चयन प्रक्रिया में निष्पक्षता और पारदर्शिता चाहते हैं। उनका मानना है कि मूल्यांकन की शुद्धता सुनिश्चित होने से योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय की आशंका कम होगी और चयन प्रक्रिया पर भरोसा और मजबूत होगा।अब अभ्यर्थियों की नजर आयोग की ओर से इस पूरे मामले पर दिए जाने वाले स्पष्टीकरण पर है। उनकी मांग है कि चयनित उम्मीदवारों की संख्या, तीन गुना चयन के नियम और पुनर्मूल्यांकन को लेकर वस्तुस्थिति जल्द स्पष्ट की जाए।