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Central government strict on AI and deepfake content, social media platforms will have to remove objectionable content within 3 hours.
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से तैयार और डीपफेक कंटेंट पर रोक लगाने के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नए नियमों के तहत फेसबुक, यू-ट्यूब, एक्स (ट्विटर) और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को एआई से तैयार या संशोधित कंटेंट पर स्पष्ट लेबल लगाना अनिवार्य होगा। यह नियम 20 फरवरी 2026 से प्रभावी होंगे।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 में संशोधन करते हुए इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। संशोधित नियमों में पहली बार "एआई जेनरेटेड" और "सिंथेटिक सूचना" की औपचारिक परिभाषा दी गई है। इसमें ऐसे ऑडियो, वीडियो या ऑडियो-विजुअल कंटेंट शामिल किए गए हैं, जो कृत्रिम रूप से तैयार किए गए हों लेकिन वास्तविक प्रतीत होते हों।
एआई कंटेंट पर लेबलिंग अनिवार्य
नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, जिन प्लेटफॉर्म पर एआई या सिंथेटिक कंटेंट बनाया या साझा किया जाता है, उन्हें ऐसी सामग्री पर स्पष्ट और प्रमुख रूप से लेबल लगाना होगा। इसके साथ ही जहां तकनीकी रूप से संभव होगा, वहां कंटेंट में स्थायी मेटाडाटा या पहचान चिह्न जोड़ना भी अनिवार्य रहेगा।
डीपफेक कंटेंट हटाने की समय सीमा घटाई
सरकार ने डीपफेक वीडियो और फोटो को हटाने की समय सीमा को 36 घंटे से घटाकर 3 घंटे कर दिया है। साथ ही यूजर्स को भी एआई से तैयार या संशोधित कंटेंट पोस्ट करते समय उसका खुलासा करना जरूरी होगा।
आपत्तिजनक कंटेंट रोकने के लिए ऑटोमेटेड टूल्स
सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को निर्देश दिया है कि वे अवैध, भ्रामक, यौन शोषण से जुड़े, बिना सहमति के तैयार किए गए और फर्जी दस्तावेजों से संबंधित एआई कंटेंट पर रोक लगाने के लिए ऑटोमेटेड टूल्स तैनात करें।
यूजर्स को दी जाएगी जागरूकता जानकारी
नए नियमों के तहत सोशल मीडिया कंपनियों को हर तीन महीने में अपने यूजर्स को यह जानकारी देना अनिवार्य होगा कि एआई के दुरुपयोग या नियमों के उल्लंघन के क्या परिणाम हो सकते हैं।