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Chandrayaan-4 mission achieves major success, safe landing site on Moon identified
नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) को चंद्रयान-4 मिशन की तैयारियों में बड़ी कामयाबी मिली है। ISRO के स्पेस एप्लिकेशन सेंटर (SAC) ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में चंद्रयान-4 की लैंडिंग के लिए एक सुरक्षित स्थान की पहचान कर ली है। वैज्ञानिकों ने करीब एक वर्ग किलोमीटर के समतल और कम जोखिम वाले क्षेत्र को चिन्हित किया है, जहां लैंडर को सुरक्षित उतारा जा सकेगा।
चंद्रयान-2 के आंकड़ों से मिली अहम जानकारी
ISRO के वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर से प्राप्त हाई रेजोल्यूशन तस्वीरों का गहन विश्लेषण किया। चंद्र सतह की ढलान, बनावट और संभावित खतरों का अध्ययन कर सुरक्षित लैंडिंग क्षेत्र का चयन किया गया। इस शोध में वैज्ञानिक अमिताभ के सुरेश, अजय के पाराशर, कनन वी अय्यर, अब्दुल एस, श्वेता वर्मा त्रिवेदी और नितांत दुबे शामिल रहे।
दक्षिणी ध्रुव पर MM-4 साइट सबसे उपयुक्त
वैज्ञानिकों ने दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में चार संभावित स्थानों का अध्ययन किया था, जिनमें से MM-4 साइट को चंद्रयान-4 की लैंडिंग के लिए सबसे सुरक्षित माना गया है। यह क्षेत्र नॉविस माउंटेन पहाड़ी के पास स्थित है, लेकिन सतह काफी समतल है। यहां बड़े गड्ढों की कमी है और सूर्य की रोशनी पर्याप्त समय तक मिलती है, जिससे मिशन संचालन में मदद मिलेगी।
ISRO का पहला मून सैंपल रिटर्न मिशन
चंद्रयान-4 मिशन ISRO के लिए ऐतिहासिक होगा, क्योंकि यह भारत का पहला मून सैंपल रिटर्न मिशन है। इस मिशन के तहत चंद्रमा की सतह से मिट्टी और पत्थरों के सैंपल एकत्र कर उन्हें सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाया जाएगा। मिशन में प्रोपल्शन मॉड्यूल, डिसेंटर मॉड्यूल, असेंडर मॉड्यूल के साथ-साथ ट्रांसफर और री-एंट्री मॉड्यूल भी शामिल होंगे।
चंद्रयान-3 की सफलता के बाद अगला बड़ा कदम
चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक सॉफ्ट लैंडिंग के बाद ISRO ने चंद्रयान-4 की योजना को और तेज किया। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस मिशन से चंद्रमा के निर्माण, उसकी भू-रचना और वहां मौजूद संभावित संसाधनों को लेकर अहम जानकारियां मिलेंगी। खासतौर पर दक्षिणी ध्रुव के कुछ अंधेरे क्षेत्रों में पानी या बर्फ के साक्ष्य मिलने की संभावना जताई जा रही है।