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Dalai Lama named in Epstein files; office responds, claims misleading
नई दिल्ली। अमेरिकी बाल यौन शोषण अपराधी जैफ्री एपस्टीन से जुड़ी एपस्टीन फाइल्स में तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा का नाम आने के दावों पर अब उनके कार्यालय की ओर से आधिकारिक बयान जारी किया गया है। धर्मशाला से जारी इस बयान में कहा गया है कि सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे दावे भ्रामक और तथ्यहीन हैं। कार्यालय ने दो टूक कहा कि दलाई लामा कभी भी जैफ्री एपस्टीन से नहीं मिले और न ही उन्होंने किसी को अपनी ओर से उससे संपर्क करने की अनुमति दी।
169 बार नाम आने के दावे पर क्या है सच्चाई
हाल के दिनों में यह दावा किया गया कि एपस्टीन फाइल्स में दलाई लामा का नाम 169 बार दर्ज है। इस पर कार्यालय ने स्पष्ट किया कि किसी दस्तावेज या फाइल में नाम का उल्लेख होना, किसी प्रकार के संबंध या सहमति का प्रमाण नहीं होता। अदालत में प्रस्तुत रिकॉर्ड बताते हैं कि दलाई लामा का नाम कुछ ईमेल और पत्राचार में जरूर आया है, लेकिन यह एकतरफा उल्लेख है।
एपस्टीन की ‘विश लिस्ट’ और छवि सुधार की कोशिश
जानकारों के अनुसार, एपस्टीन अपनी छवि सुधारने और खुद को प्रभावशाली दिखाने के लिए दुनिया के प्रतिष्ठित नेताओं और धार्मिक गुरुओं के नामों का इस्तेमाल करता था। ईमेल रिकॉर्ड्स से संकेत मिलते हैं कि एपस्टीन और उसकी टीम ने दलाई लामा को विभिन्न कार्यक्रमों और सम्मेलनों से जोड़ने की कोशिश की, ताकि उसकी साख बढ़ सके। हालांकि, इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि दलाई लामा ने कभी इन प्रस्तावों को स्वीकार किया।
विशेषज्ञों की राय: नाम आना अपराध नहीं
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि एपस्टीन फाइल्स में नाम दर्ज होना किसी व्यक्ति को अपराध से जोड़ने का आधार नहीं बनता। इन फाइल्स में बिल क्लिंटन और स्टीफन हॉकिंग जैसे कई प्रतिष्ठित नाम भी दर्ज हैं।
फर्जी तस्वीरों की पोल खुली
सोशल मीडिया पर वायरल दलाई लामा और एपस्टीन की कथित तस्वीरों को पूरी तरह फर्जी और एडिटेड पाया गया है। दलाई लामा के कार्यालय ने लोगों से अपील की है कि वे भ्रामक सूचनाओं पर भरोसा न करें और तथ्यों के आधार पर ही राय बनाएं।