

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

Chhattisgarh Assembly: Congress's no-confidence motion rejected by voice vote after a debate that lasted late into the night.
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन कांग्रेस द्वारा मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव आखिरकार ध्वनिमत से अस्वीकृत हो गया। 136 बिंदुओं वाले इस प्रस्ताव पर सदन में दोपहर 12 बजकर 10 मिनट से शुरू हुई बहस रात 2 बजकर 36 मिनट तक चली। करीब 14 घंटे 26 मिनट तक चली चर्चा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखे आरोप-प्रत्यारोप हुए।बहस के दौरान कई बार सदन का माहौल गरमाया। हंगामे के चलते एक बार विधानसभा की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित भी करनी पड़ी। चर्चा में पक्ष और विपक्ष के कुल 18 सदस्यों ने हिस्सा लिया। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष डा. रमन सिंह ने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि दिसंबर के अंतिम सप्ताह में विधानसभा का शीतकालीन सत्र आयोजित किया जाएगा।
अविश्वास प्रस्ताव पेश करते हुए नेता प्रतिपक्ष डा. चरणदास महंत ने आरोप लगाया कि साय सरकार का 136 सप्ताह का कार्यकाल जनता की उम्मीदों के विपरीत रहा है। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव केवल विपक्ष का आरोप पत्र नहीं, बल्कि आम जनता की आवाज है।महंत ने सरकार पर आदिवासी, किसान, महिला और युवा विरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने हसदेव अरण्य में पेड़ों की कटाई, कानून-व्यवस्था, महतारी वंदन योजना, शराब बिक्री और आदिवासी क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार को घेरा।उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल के शपथ लेने से पहले ही हसदेव क्षेत्र में पेड़ों की कटाई का निर्णय ले लिया गया था। इसके अलावा उन्होंने भारतमाला परियोजना, सरकारी जमीनों के आवंटन, पेसा कानून और आदिवासी अधिकारों को लेकर भी सरकार पर सवाल खड़े किए।महंत ने बलौदाबाजार घटना, महिला सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था का मुद्दा उठाते हुए कहा कि प्रदेश में कई महत्वपूर्ण विभागों में पद खाली पड़े हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार योजनाओं के नाम पर जनता को राहत देने का दावा कर रही है, जबकि दूसरी ओर लोगों की परेशानियां बढ़ रही हैं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अविश्वास प्रस्ताव को केवल औपचारिकता करार देते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का पिछला कार्यकाल आपसी खींचतान और सत्ता संघर्ष में बीत गया।मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में किए गए 36 वादों को पूरा नहीं किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने महिलाओं को 500 रुपये देने का वादा किया था, लेकिन वर्तमान सरकार महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं को हर महीने 1000 रुपये की सहायता दे रही है।उन्होंने विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यदि भ्रष्टाचार और झूठ बोलने में कोई डिग्री होती तो कांग्रेस उसमें विशेषज्ञ होती। मुख्यमंत्री ने सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए दावा किया कि भाजपा सरकार जनता के हित में लगातार काम कर रही है और आने वाले चुनाव में पार्टी 70 सीटों का लक्ष्य हासिल करेगी।
भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि जिनके घर शीशे के बने होते हैं, उन्हें दूसरों पर पत्थर नहीं फेंकना चाहिए।उन्होंने कांग्रेस के आरोप पत्र को कमजोर बताते हुए कहा कि पिछली सरकार ने प्रदेश को नुकसान पहुंचाया। चंद्राकर ने कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में कथित पीएससी घोटाले, गोबर खरीदी में अनियमितता, राजीव मितान क्लब और अन्य योजनाओं में गड़बड़ियों का मुद्दा उठाया।उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार में मुख्यमंत्री पद को लेकर अंदरूनी खींचतान चलती रही, जिसका असर प्रदेश के विकास पर पड़ा।
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कांग्रेस के अविश्वास प्रस्ताव को झूठ का पुलिंदा बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का संबंध केवल भ्रष्टाचार से रहा है। उन्होंने कांग्रेस के 2018 के घोषणा पत्र का जिक्र करते हुए कहा कि जनता ने उसके वादों का जवाब चुनाव में दे दिया।
गृह मंत्री विजय शर्मा ने प्रधानमंत्री आवास योजना का जिक्र करते हुए कहा कि पिछली सरकार के समय गरीबों को आवास योजना का पूरा लाभ नहीं मिला। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में 11 लाख से अधिक आवास बनाए जा चुके हैं और निर्माण कार्य लगातार जारी है।उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी का नाम माओवादी हिडमा के संदर्भ में लिया, जिस पर विपक्ष ने आपत्ति जताई। इसके बाद सदन में हंगामा हुआ और कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी।
कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि विपक्ष केवल सुर्खियां बटोरने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में पहली बार आदिवासी समाज से मुख्यमंत्री बना है, लेकिन विपक्ष इसे स्वीकार नहीं कर पा रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि सत्ता पक्ष के सदस्य अपनी सरकार की कोई बड़ी उपलब्धि नहीं बता पाए। उन्होंने किसानों को खाद की समस्या, हसदेव क्षेत्र में पेड़ों की कटाई और कर्मचारियों की परेशानियों का मुद्दा उठाया।बघेल ने आरोप लगाया कि सरकार कर्मचारियों को वेतन देने में भी परेशानी महसूस कर रही है। उन्होंने कहा कि जनता से किए गए वादों को पूरा करने में सरकार विफल रही है।
कांग्रेस विधायक कवासी लखमा ने कहा कि प्रदेश में आदिवासी मुख्यमंत्री होने के बावजूद आदिवासी समाज अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है।संजारी बालोद की विधायक संगीता सिन्हा ने सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों के कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं और सरकार उनकी समस्याओं का समाधान नहीं कर रही है।
प्रश्नकाल के दौरान महतारी वंदन योजना को लेकर महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े विपक्ष के सवालों से घिरीं। कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने पूछा कि पहली किश्त मिलने के बाद कितने लाभार्थियों के नाम हटाए गए और आंकड़ों में अंतर क्यों दिखाई दे रहा है।मंत्री ने जवाब दिया कि ईकेवाईसी नहीं होने, दोहरे आवेदन, आयु सीमा पूरी नहीं करने और आयकर दायरे में आने वाले लोगों के आवेदन हटाए गए हैं। उन्होंने कहा कि पात्र हितग्राहियों को योजना का लाभ लगातार दिया जा रहा है।
बहस के दौरान उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा द्वारा माओवादी हिडमा के संदर्भ में राहुल गांधी का नाम लेने पर विपक्ष ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव ने इस संबंध में प्रमाण मांगा। इस मुद्दे को लेकर सदन में काफी देर तक हंगामा हुआ और कार्यवाही रोकनी पड़ी।