

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

Chhattisgarh Assembly: Ruckus in Assembly over financial approval, opposition stages walkout
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान प्रश्नकाल में आज वित्तीय स्वीकृति को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया। कांग्रेस विधायक संगीता सिन्हा ने बजट में शामिल विभिन्न विकास कार्यों को अब तक वित्तीय स्वीकृति नहीं मिलने का मुद्दा उठाते हुए सरकार से स्पष्ट जानकारी मांगी।
“कौन-कौन से कार्य लंबित?”
संगीता सिन्हा ने सवाल किया कि आखिर कौन से कार्य वित्त विभाग में लंबित हैं और स्वीकृति देने में देरी क्यों हो रही है। जवाब में वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि वर्तमान में वित्त विभाग में कोई भी कार्य लंबित नहीं है।
मंत्री के इस जवाब पर कांग्रेस विधायकों ने आपत्ति जताई और आरोप लगाया कि सिंचाई (इरिगेशन) और लोक निर्माण विभाग (PWD) से जुड़े कई कार्य वित्त विभाग में जाकर पेंडिंग हो जाते हैं।
“कोई कार्य जानबूझकर लंबित नहीं”
वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने स्पष्ट किया कि सरकार की मंशा पूरी तरह साफ है और कोई भी कार्य जानबूझकर लंबित नहीं रखा जाता। उन्होंने बताया कि विकास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। नवीन मद की राशि में बढ़ोतरी की गई है। मशीन एवं उपकरण खरीद की सीमा 50 हजार रुपये से बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये कर दी गई है। वहीं प्रशासकीय स्वीकृति की सीमा 2 करोड़ से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये कर दी गई है।
मंत्री ने कहा कि बजट में अधिक प्रावधान होना एक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन स्वीकृति प्राथमिकता के आधार पर दी जाती है ताकि जरूरी कार्य समय पर पूरे हो सकें।
भूपेश बघेल का हस्तक्षेप
इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस विधायक भूपेश बघेल ने बालोद जिले का मुद्दा उठाते हुए वहां के कार्यों की स्थिति स्पष्ट करने को कहा। इस पर वित्त मंत्री ने दोहराया कि बालोद जिले से संबंधित भी कोई फाइल वित्त विभाग में लंबित नहीं है।
भूपेश बघेल ने कटाक्ष करते हुए पूछा कि क्या PWD से फाइल मंगाकर उसे स्वीकृत किया जाएगा। मंत्री ने जवाब दिया कि हर कार्य की एक निर्धारित प्रक्रिया होती है और उसी के तहत निर्णय लिए जाते हैं।
विपक्ष का वॉकआउट
कांग्रेस विधायकों ने तर्क दिया कि 18 करोड़ रुपये तक की स्वीकृति सरकार आसानी से दे सकती है, फिर भी देरी की जा रही है। मंत्री के जवाबों से असंतुष्ट विपक्षी विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। प्रश्नकाल के दौरान वित्तीय स्वीकृति को लेकर हुई इस तीखी बहस ने बजट सत्र के माहौल को गरमा दिया।