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Chhattisgarh High Court issues important ruling: Wife living in adultery will not receive alimony
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने गुजारा भत्ता से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की सिंगल बेंच ने स्पष्ट किया है कि यदि पत्नी व्यभिचार में रह रही है, तो वह अपने पति से गुजारा भत्ता पाने की हकदार नहीं होगी। कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए पत्नी की याचिका खारिज कर दी है। हालांकि, नाबालिग बच्चे के लिए तय की गई राशि को यथावत रखा गया है।
फैमिली कोर्ट के फैसले को मिली मंजूरी
मामले में फैमिली कोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर यह माना था कि पत्नी किसी अन्य व्यक्ति के साथ रह रही है। इसी आधार पर पत्नी को गुजारा भत्ता देने से इनकार किया गया था, जबकि बच्चे के लिए हर माह 6500 रुपये गुजारा भत्ता तय किया गया था। हाई कोर्ट ने इस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
क्या है पूरा मामला
बिलासपुर निवासी महिला का विवाह 22 नवंबर 2009 को रायपुर में पदस्थ एक कांस्टेबल से हुआ था। महिला ने अदालत में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि शादी के बाद उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया और बाद में घर से निकाल दिया गया। उसने पति की नौकरी और कृषि भूमि से होने वाली आय का हवाला देते हुए अपने और अपने 7 वर्षीय बेटे के लिए गुजारा भत्ता मांगा था।
पति ने पेश किए सबूत
पति की ओर से कोर्ट में सबूत प्रस्तुत किए गए कि उसकी पत्नी किसी अन्य व्यक्ति के साथ रह रही है। इन साक्ष्यों के आधार पर फैमिली कोर्ट ने पत्नी को गुजारा भत्ता देने से इनकार कर दिया था।
बच्चे के अधिकार सुरक्षित
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि मां के आचरण का असर नाबालिग बच्चे के अधिकारों पर नहीं पड़ेगा। इसलिए बच्चे के लिए तय की गई 6500 रुपये प्रतिमाह की गुजारा भत्ता राशि को सही ठहराया गया है।