

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

Chhattisgarh High Court issues important ruling, says being L-1 doesn't grant contract, cancelling tender is legal
बिलासपुर। हाई कोर्ट ने सरकारी टेंडर प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि किसी फर्म का सबसे कम बोलीदाता (L-1) होना मात्र उसे वर्क ऑर्डर पाने का कानूनी अधिकार नहीं देता। कोर्ट ने रायपुर की फर्म मेसर्स ग्लोबल सर्विसेज की याचिका को खारिज कर दिया।
क्या था मामला?
फर्म ने जांजगीर-नैला नगरपालिका परिषद द्वारा 95 मैनपावर कर्मियों की सप्लाई के लिए जारी टेंडर में सबसे कम बोली लगाई थी। इसके बावजूद वर्क ऑर्डर जारी नहीं किया गया और 17 मार्च 2026 को टेंडर प्रक्रिया रद्द कर दी गई।
जेम पोर्टल नीति बनी वजह
नगरपालिका ने टेंडर रद्द करने का कारण बताते हुए कहा कि राज्य सरकार की नई नीति के तहत अब सभी खरीद और सेवाएं Government e-Marketplace (GeM) पोर्टल के माध्यम से करना अनिवार्य कर दिया गया है।
कोर्ट ने क्या कहा?
डिवीजन बेंच ने कहा कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी यदि सार्वजनिक हित में नीतिगत बदलाव होता है, तो प्रशासन को टेंडर रद्द करने का अधिकार है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में निर्णय न तो मनमाना था और न ही दुर्भावना से प्रेरित।
सार्वजनिक हित सर्वोपरि
कोर्ट ने माना कि प्रशासनिक अधिकारियों को सार्वजनिक हित में किसी भी स्तर पर टेंडर रद्द करने का अधिकार है, बशर्ते निर्णय तर्कसंगत और पारदर्शी हो। इस मामले में कोई प्रक्रियात्मक खामी नहीं पाई गई।
नीतिगत फैसलों को दी प्राथमिकता
अदालत ने याचिकाकर्ता के इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि नई नीति को पुराने टेंडर पर लागू नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक संसाधनों के उपयोग में सरकार की नीतियां सर्वोपरि होती हैं।