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Chhattisgarh: Notorious Maoist Ganpati arrested from Nepal, may be brought to India and forced to surrender
रायपुर। माओवादी हिंसा के सबसे कुख्यात चेहरों में गिने जाने वाले पूर्व महासचिव माओवादी गणपति गिरफ्तारी की खबर सामने आई है। केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों के अनुसार गणपति को नेपाल से पकड़कर भारत लाया गया है। बताया जा रहा है कि आने वाले दिनों में उसका औपचारिक समर्पण कराया जा सकता है।
हालांकि बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी. ने कहा है कि इस तरह की सूचनाएं सामने आई हैं, लेकिन अभी तक किसी भी राज्य या केंद्रीय एजेंसी की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
सात दशक से अधिक समय तक रहा भूमिगत
आंध्रप्रदेश के कृष्णा जिले में जन्मा गणपति छात्र जीवन में ही वामपंथी विचारधारा से प्रभावित हो गया था। 1970 के दशक में वह पीपुल्स वार ग्रुप (PWG) से जुड़ गया और धीरे-धीरे उग्र वामपंथी आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने लगा।
रणनीतिक समझ और संगठन को मजबूत करने की क्षमता के कारण उसका कद तेजी से बढ़ा। वर्ष 2004 में पीपुल्स वार ग्रुप और माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर (MCC) के विलय के बाद भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) का गठन हुआ, जिसमें गणपति को महासचिव बनाया गया।
कई बड़े हमलों से जुड़ा रहा नाम
माओवादी गणपति गिरफ्तारी की खबर इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि उसके नेतृत्व में कई बड़े माओवादी हमले हुए थे। इनमें 2010 का दंतेवाड़ा हमला शामिल है, जिसमें सीआरपीएफ के 76 जवान शहीद हुए थे।
इसके अलावा 2013 का झीरम घाटी हमला भी बेहद चर्चित रहा, जिसमें कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं की हत्या कर दी गई थी। गणपति करीब 14 वर्षों तक (2004-2018) माओवादी संगठन का प्रमुख रहा और देश में माओवादी गतिविधियों की रणनीति तय करने में केंद्रीय भूमिका निभाता रहा।
2018 में छोड़ा था महासचिव पद
लगातार सुरक्षा दबाव, कई माओवादी नेताओं की गिरफ्तारी और बढ़ती उम्र व बीमारी के कारण गणपति ने 2018 में महासचिव पद छोड़ दिया था। इसके बाद संगठन की कमान नंबाला केशव राव उर्फ बसवराज को सौंप दी गई।