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Chhattisgarh: Top Naxalite leadership eliminated in Chhattisgarh, Bastar moving towards Naxal-free
रायपुर। पापाराव के आत्मसमर्पण के साथ ही छत्तीसगढ़ में नक्सलियों का शीर्ष नेतृत्व समाप्त हो गया है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार अब सिर्फ बीजापुर और कांकेर में चार एरिया कमेटियों के 15 सदस्य सक्रिय हैं, जो हथियार छोड़कर गांवों में छिपे हुए हैं। माना जा रहा है कि ये सदस्य भी जल्द आत्मसमर्पण कर देंगे।
नक्सलमुक्त जिले और भविष्य
जगदलपुर और कोंडागांव लंबे समय से नक्सलमुक्त हैं। दंतेवाड़ा, सुकमा और नारायणपुर में भी अब कोई सक्रिय नक्सली नहीं बचा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 31 मार्च को बस्तर के शेष पांच जिलों को नक्सलमुक्त घोषित करने की तैयारी कर सकते हैं।
बचे हुए शीर्ष नक्सली
सुरक्षा सूत्रों के अनुसार दो शीर्ष नेता अभी सक्रिय हैं:
मुपल्ला लक्ष्मण राव (उर्फ गणपति बया) – सेंट्रल कमेटी का सलाहकार, फिलहाल नेपाल में। मिहिर बेसरा (उर्फ भास्कर) – पोलित ब्यूरो का सदस्य, झारखंड के गिरिडीह जिले का निवासी। इन दोनों पर आईबी की नजर है और अनुमान है कि ये भी जल्द आत्मसमर्पण कर सकते हैं।
नक्सली संगठन की समाप्ति की दिशा
वर्ष 2025 में केंद्रीय कमेटी के 11 सदस्य मारे गए और 5 ने आत्मसमर्पण किया। इसके अलावा, बस्तर में हजारों ग्रामीण आरपीसी मेंबर के रूप में नक्सलियों के विचारधारा से जुड़े हुए थे, जिन्हें अब मुख्यधारा में लाया जा रहा है।
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि यह दो वर्षों में हुआ है जो दशकों में संभव नहीं हो पाया। इस अभियान के पूरा होने के साथ ही छत्तीसगढ़ नक्सलमुक्त राज्य बनने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।