

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

Chhattisgarh’s teacher recruitment roster—which included over 60 percent reservation—has been quashed; the High Court has imposed conditions on the appointments.
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षक भर्ती के आरक्षण रोस्टर को लेकर हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकल पीठ ने वर्ष 2023 की शिक्षक भर्ती के उस विज्ञापन को निरस्त कर दिया है, जिसमें 29 नवंबर 2012 की आरक्षण अधिसूचना और उसके आधार पर तैयार मॉडल रोस्टर लागू किया गया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस फैसले से पूरी भर्ती प्रक्रिया स्वतः समाप्त नहीं होगी और पहले से नियुक्त शिक्षकों को तत्काल पद से नहीं हटाया जाएगा। हालांकि, नियुक्तियां और भविष्य में होने वाली पदोन्नतियां सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले के अंतिम फैसले के अधीन रहेंगी।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में दलील दी गई कि राज्य सरकार ने 29 नवंबर 2012 की अधिसूचना के माध्यम से कुल आरक्षण बढ़ाकर 58 प्रतिशत कर दिया था। इसके तहत अनुसूचित जाति के लिए 12 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति के लिए 32 प्रतिशत और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 14 प्रतिशत आरक्षण निर्धारित किया गया था।इस आरक्षण व्यवस्था को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की खंडपीठ ने 19 सितंबर 2022 को निरस्त कर दिया था। इसके बाद राज्य सरकार ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने 1 मई 2023 को पहले से लंबित भर्ती और पदोन्नति प्रक्रियाओं को अंतिम निर्णय के अधीन पूरा करने की अनुमति दी थी।
राज्य शासन ने 4 मई 2023 को सहायक शिक्षक, शिक्षक और व्याख्याता के पदों पर नियुक्ति के लिए व्यापमं के माध्यम से भर्ती विज्ञापन जारी किया था। इस प्रक्रिया के तहत सरगुजा और बस्तर संभाग सहित विभिन्न जिलों के लिए आरक्षण रोस्टर तैयार किया गया था।याचिकाकर्ताओं ने आपत्ति जताई कि जब हाई कोर्ट की खंडपीठ वर्ष 2022 में ही 58 प्रतिशत आरक्षण से संबंधित अधिसूचना और मॉडल रोस्टर को निरस्त कर चुकी थी, तब उसी व्यवस्था के आधार पर नया भर्ती विज्ञापन जारी करना उचित नहीं था। उनका कहना था कि अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए निर्धारित सीमा से अधिक पद आरक्षित किए गए।
याचिका में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, भर्ती के दोनों कैडर में अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित पदों का अनुपात 60 प्रतिशत से अधिक था।
ई-कैडर के कुल 1,113 पदों में से 698 पद अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए निर्धारित किए गए थे। यह कुल पदों का लगभग 62.71 प्रतिशत था।
टी-कैडर के कुल 4,659 पदों में से 3,105 पद अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित रखे गए थे। इस तरह यहां आरक्षण का अनुपात लगभग 66.64 प्रतिशत पहुंच गया था।नियुक्तियां और पदोन्नतियां सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले से जुड़ी रहेंगीहाई कोर्ट ने भर्ती विज्ञापन को निरस्त करते हुए यह भी स्पष्ट किया कि पहले से नियुक्त शिक्षकों को तत्काल हटाने की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह समाप्त करने के बजाय नियुक्तियों और आगे होने वाली पदोन्नतियों को सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले के अंतिम निर्णय के अधीन रखा है।इस फैसले का असर राज्य में शिक्षक भर्ती की आरक्षण व्यवस्था पर पड़ सकता है। अब संबंधित नियुक्तियों और पदोन्नतियों की स्थिति सुप्रीम कोर्ट में लंबित प्रकरण के अंतिम परिणाम से जुड़ी रहेगी।