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नारायणपुर। सुशासन तिहार के तहत नारायणपुर प्रवास पर पहुंचे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अबूझमाड़ की समृद्ध आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को करीब से जाना। गारपा स्थित पारंपरिक घोटुल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने स्थानीय ग्रामीणों के साथ बैठकर पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लिया और क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत की सराहना की।
चापड़ा चटनी से लेकर कोसरा भात तक का लिया आनंद
मुख्यमंत्री के स्वागत में अबूझमाड़ के विशेष पारंपरिक व्यंजन परोसे गए। इनमें क्षेत्र की पहचान मानी जाने वाली प्रसिद्ध चापड़ा चटनी, कोसरा भात, कोलयारी, विभिन्न प्रकार की स्थानीय भाजियां, खीर और अन्य पारंपरिक खाद्य पदार्थ शामिल थे। मुख्यमंत्री ने इन व्यंजनों के स्वाद की प्रशंसा करते हुए इनके पोषण महत्व को भी रेखांकित किया।
स्थानीय खाद्य परंपराएं हमारी सांस्कृतिक धरोहर
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि स्थानीय खानपान और पारंपरिक खाद्य संस्कृति किसी भी क्षेत्र की पहचान होती है। उन्होंने कहा कि अबूझमाड़ की खाद्य परंपराएं यहां की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और जनजातीय जीवन शैली को दर्शाती हैं, जिन्हें संरक्षित और प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
ग्रामीणों के साथ साझा किया पारंपरिक भोजन
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों के साथ आत्मीय माहौल में भोजन किया। इस अवसर पर वन मंत्री केदार कश्यप, पद्मश्री पंडीराम मंडावी, गारपा के सरपंच सन्नूराम धुर्वा, गायता, पुजारी तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणजन मौजूद रहे। सभी ने मिलकर पारंपरिक व्यंजनों का आनंद लिया और स्थानीय संस्कृति की विशेषताओं पर चर्चा की।
सुशासन तिहार में दिखी संस्कृति और संवाद की झलक
मुख्यमंत्री का यह दौरा केवल प्रशासनिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके माध्यम से उन्होंने आदिवासी समाज की जीवनशैली, खानपान और सांस्कृतिक परंपराओं को भी करीब से समझने का प्रयास किया। गारपा के घोटुल में आयोजित यह आयोजन स्थानीय लोगों के लिए भी यादगार बन गया।