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Coal block allocation case: Former PM Manmohan Singh gets clean chit from Supreme Court after 11 years; summons quashed.
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़े बहुचर्चित मामले में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ जारी समन को रद्द कर दिया है। अदालत ने मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार करते हुए कहा कि उनके खिलाफ आगे आपराधिक कार्यवाही का आधार नहीं बनता।
यह मामला संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) सरकार के कार्यकाल के दौरान ओडिशा स्थित तलाबीरा-II कोल ब्लॉक के हिंदाल्को इंडस्ट्रीज को कथित अनियमित आवंटन से संबंधित है। उस समय डॉ. मनमोहन सिंह के पास प्रधानमंत्री पद के साथ-साथ कोयला मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी था।
CBI ने जांच के बाद मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी, लेकिन दिल्ली की विशेष ट्रायल कोर्ट ने वर्ष 2015 में उसे स्वीकार नहीं किया और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, उद्योगपति कुमार मंगलम बिरला, पूर्व कोयला सचिव पी.सी. पारख समेत अन्य आरोपियों को समन जारी कर दिया था। ट्रायल कोर्ट का मानना था कि मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं।
समन जारी होने के बाद डॉ. मनमोहन सिंह ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। उन्होंने दलील दी कि जब CBI स्वयं उनके खिलाफ अभियोजन योग्य साक्ष्य नहीं मिलने की बात कह चुकी है, तब ट्रायल कोर्ट द्वारा समन जारी करना कानून के अनुरूप नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2015 में ट्रायल कोर्ट के समन पर अंतरिम रोक लगा दी थी। इसके बाद यह मामला एक दशक से अधिक समय तक सर्वोच्च अदालत में लंबित रहा और इस दौरान पूर्व प्रधानमंत्री को मुकदमे का सामना नहीं करना पड़ा।
डॉ. मनमोहन सिंह का 26 दिसंबर 2024 को 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। उनके निधन के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर अंतिम निर्णय सुनाते हुए समन रद्द कर दिया और CBI की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली। इसके साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ इस मामले में सभी न्यायिक कार्यवाही समाप्त हो गई।