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Congress deliberates on the return of 36 leaders... decision on the cases of Renu Jogi and Amit Jogi still pending.
रायपुर। प्रदेश कांग्रेस की अनुशासन समिति की बैठक में पार्टी से निष्कासित 36 नेताओं की वापसी से जुड़े आवेदनों पर विस्तार से चर्चा हुई। राजीव भवन में हुई इस बैठक में अलग-अलग मामलों की वजह, नेताओं के आवेदन, माफीनामे और संगठन से मिले फीडबैक समेत कई पहलुओं की समीक्षा की गई।बैठक में कुछ नेताओं की पार्टी में वापसी के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई, जबकि कई मामलों को खारिज कर दिया गया। कुछ प्रकरणों पर संबंधित जिला कांग्रेस कमेटियों से रिपोर्ट और अभिमत मांगा गया है। समिति आगे प्राप्त जानकारी के आधार पर इन मामलों में निर्णय लेगी।
पूर्व विधायक डा. रेणु जोगी, अमित जोगी और बृहस्पति सिंह से जुड़े मामलों पर भी बैठक में चर्चा हुई। हालांकि इन नेताओं की वापसी को लेकर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। इन प्रकरणों को फिलहाल लंबित रखा गया है।समिति इन मामलों में संबंधित पक्षों की ओर से दिए गए आवेदन और संगठन स्तर से प्राप्त जानकारी की समीक्षा के बाद आगे की कार्रवाई करेगी। बताया गया है कि कुछ नेताओं ने पार्टी में लौटने की इच्छा जताते हुए माफीनामा भी प्रस्तुत किया है।
बैठक में कुल 36 आवेदन विचार के लिए रखे गए थे। इनमें कुछ मामलों में निष्कासन खत्म कर पार्टी में वापसी का रास्ता साफ किया गया, जबकि करीब 15 से 16 आवेदनों को निरस्त कर दिया गया। बाकी मामलों में संगठन से जानकारी लेने या आगे विचार करने का निर्णय लिया गया।अनुशासन समिति के अध्यक्ष धनेन्द्र साहू ने बताया कि जोगी कांग्रेस की ओर से कांग्रेस में विलय का प्रस्ताव भी समिति के सामने आया है, लेकिन इस पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
पूर्व मुख्यमंत्री स्व. अजीत जोगी की ओर से गठित जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के कांग्रेस में विलय का प्रस्ताव भी बैठक में चर्चा का विषय रहा। फिलहाल इस प्रस्ताव को रोककर रखा गया है।जोगी कांग्रेस की ओर से पार्टी के कांग्रेस में विलय के साथ उसके प्रमुख नेताओं और पदाधिकारियों की कांग्रेस में वापसी का प्रस्ताव दिया गया था। इसमें डा. रेणु जोगी और अमित जोगी समेत अन्य नेताओं की कांग्रेस में वापसी का मुद्दा भी शामिल है।अब 27 सितंबर को छत्तीसगढ़ के नए कांग्रेस प्रभारी सुखदेव भगत के रायपुर दौरे के दौरान प्रदेश पदाधिकारियों के साथ होने वाली बैठक में इस विषय पर आगे चर्चा होने की संभावना है। इसके बाद ही विलय और संबंधित नेताओं की वापसी को लेकर तस्वीर स्पष्ट हो सकती है।
अनुशासन समिति की बैठक में अध्यक्ष धनेन्द्र साहू के साथ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज और प्रभारी महामंत्री मलकीत सिंह गैंदू समेत संगठन के कई पदाधिकारी शामिल हुए। प्रभारी सचिवों एस. संपत, जरिता लैतफलांग और विजय जांगिड़ ने वर्चुअल माध्यम से बैठक में हिस्सा लिया।इसके अलावा धनेश पाटिला, प्रतिमा चंद्राकर, रवि घोष, जे.पी. श्रीवास्तव, दीपक मिश्रा और नरेश ठाकुर समेत अन्य पदाधिकारी भी बैठक में मौजूद रहे।
अनुशासन समिति पार्टी नेताओं की सार्वजनिक गतिविधियों और बयानों को लेकर निगरानी का दायरा बढ़ाने की तैयारी में है। सोशल मीडिया पोस्ट, न्यूज चैनलों पर दिए गए बयान, अखबारों में प्रकाशित टिप्पणियां और सार्वजनिक मंचों से पार्टी या संगठन को लेकर कही गई बातों पर नजर रखी जा सकती है।पार्टी के अनुशासन संबंधी प्रावधानों के तहत स्वीकृत नीतियों और कार्यक्रमों की सार्वजनिक रूप से प्रतिकूल आलोचना को भी देखा जाता है। खासतौर पर चुनाव के दौरान अधिकृत प्रत्याशी या संगठन के फैसले के खिलाफ गतिविधियों और पार्टी लाइन से अलग सार्वजनिक अभियान को गंभीरता से लिए जाने की संभावना है।पहले संबंधित नेता को नोटिस देकर उसका पक्ष जानने और जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई पर विचार किए जाने की बात सामने आई है।