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Major twist in the case of 23 people sent to Raipur on suspicion of being Bangladeshi... most released after document verification; focus now shifts to the remaining individuals.
बिलासपुर। सिरगिट्टी इलाके में बांग्लादेशी नागरिक होने के संदेह में हिरासत में लिए गए प्रवासी कामगारों के मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ तस्वीर बदलती नजर आ रही है। पुलिस ने 23 लोगों को पहचान और दस्तावेजों के सत्यापन के लिए रायपुर स्थित होल्डिंग या डिटेंशन सेंटर भेजा था। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद और संबंधित थाना क्षेत्रों से दस्तावेजों की पुष्टि के बाद बड़ी संख्या में लोगों को रिहा किए जाने की जानकारी सामने आई है।उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, सत्यापन के बाद 18 से 19 लोगों को भारतीय नागरिक होने की पुष्टि के बाद छोड़ा गया है। अलग-अलग रिपोर्टों में रिहा किए गए लोगों की संख्या 18 और 19 बताई गई है, जबकि बाकी लोगों के दस्तावेजों की जांच अभी जारी है।
इस मामले में एसएसपी रजनेश सिंह के निर्देश पर विशेष टास्क फोर्स बनाई गई थी। टीम ने संदिग्ध लोगों के दस्तावेजों में दर्ज पते की पुष्टि के लिए पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद, जंगीपुर और संबंधित थाना क्षेत्रों का दौरा किया। वहां स्थानीय पुलिस अधिकारियों से दस्तावेज और पहचान संबंधी जानकारी साझा कर सत्यापन कराया गया।पुलिस की शुरुआती कार्रवाई में इन लोगों की पहचान और निवास से जुड़े दस्तावेजों में विसंगतियां सामने आने की बात कही गई थी। इसी आधार पर 4 सितंबर को 23 लोगों को रायपुर के होल्डिंग या डिटेंशन सेंटर भेजा गया था।
सत्यापन की प्रक्रिया आगे बढ़ने पर मुर्शिदाबाद के संबंधित थाना क्षेत्रों से दस्तावेजों की पुष्टि कराई गई। इसके बाद जिन लोगों की पहचान और मूल निवास भारतीय पाए गए, उन्हें सेंटर से रिहा किया गया। इनमें कई लोग रोजगार के सिलसिले में छत्तीसगढ़ आए थे और घर-घर जाकर घरेलू सामान बेचने जैसे काम करते थे।पुलिस के मुताबिक, संदिग्धों की पहचान और दस्तावेजों की पुष्टि के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जानी है। इसलिए जिन लोगों के कागजात अभी अधूरे या संदिग्ध हैं, उनकी जांच जारी है।
मामले में बचे लोगों के दस्तावेजों और पहचान से जुड़ी जानकारी को लेकर पुलिस अतिरिक्त कागजात मंगवा रही है। उपलब्ध रिपोर्टों में इनके नाम और संख्या को लेकर भी अंतर दिखाई देता है। ऐसे में अंतिम स्थिति दस्तावेज सत्यापन पूरा होने के बाद ही स्पष्ट होगी।यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि शुरुआती कार्रवाई में सभी 23 लोगों को संदिग्ध मानकर रायपुर भेजा गया था, लेकिन सत्यापन के बाद अधिकांश लोगों को रिहा करना पड़ा। इससे अब जांच की प्रक्रिया और शुरुआती पहचान को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
बिलासपुर पुलिस ने शुरुआत में कहा था कि राज्य शासन के निर्देश पर अवैध अप्रवासियों और बिना वैध दस्तावेजों के रह रहे संदिग्ध लोगों की पहचान के लिए अभियान चलाया गया। इस दौरान सिरगिट्टी क्षेत्र के 23 लोगों को चिन्हित किया गया। पुलिस टीम ने पश्चिम बंगाल जाकर उनके बताए गए पतों और पहचान संबंधी रिकॉर्ड की जांच भी की थी।फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बिंदु यही है कि शुरुआती संदेह के बाद दस्तावेज सत्यापन में अधिकांश लोगों की भारतीय पहचान सामने आई है, जबकि शेष लोगों की स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी।