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Congress protests cancellation of Meenakshi Natarajan's nomination; stages sit-in outside Election Commission office.
नई दिल्ली। मध्य प्रदेश की राज्यसभा चुनाव प्रक्रिया में नया राजनीतिक विवाद सामने आया है। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किए जाने के विरोध में पार्टी नेताओं ने दिल्ली स्थित चुनाव आयोग कार्यालय के बाहर धरना दिया। धरने में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल, वरिष्ठ नेता जयराम रमेश और सचिन पायलट समेत कई नेता शामिल रहे।
भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश के रिटर्निंग ऑफिसर ने शाम 5:30 बजे सुनवाई का समय दिया, लेकिन उसी समय कार्यालय बंद हो गया। उन्होंने कहा कि नामांकन रद्द किए जाने के फैसले के खिलाफ आवेदन जमा करने में कांग्रेस को कठिनाई का सामना करना पड़ा।
बघेल के अनुसार, जब कांग्रेस नेता भारत निर्वाचन आयोग पहुंचे तो वहां भी कार्यालय बंद हो चुका था। उन्होंने कहा कि धरने पर बैठने के बाद आयोग के एक कर्मचारी ने उनका आवेदन स्वीकार किया। बघेल का कहना है कि आवेदन स्वीकार होने के बाद ही न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ाने का रास्ता खुल सकेगा।
18 जून को होने वाले मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव के लिए चार उम्मीदवार मैदान में थे। इनमें कांग्रेस की ओर से मीनाक्षी नटराजन भी उम्मीदवार थीं। मंगलवार को उनका नामांकन रद्द कर दिया गया।
भाजपा ने आपत्ति दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि मीनाक्षी नटराजन ने हैदराबाद की एक अदालत में लंबित मामले की जानकारी नामांकन पत्र में नहीं दी। इसके बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। निर्धारित समय तक प्राप्त जवाब से संतुष्ट न होने पर नामांकन खारिज कर दिया गया।
कांग्रेस ने नामांकन रद्द करने के फैसले को गलत और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि चुनाव आयोग भाजपा के दबाव में काम कर रहा है। कांग्रेस का कहना है कि जिस मामले का हवाला देकर नामांकन रद्द किया गया, वह न तो आपराधिक मामला है और न ही उस पर अदालत ने संज्ञान लिया है।
पार्टी ने संकेत दिए हैं कि वह इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकती है।
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद राज्यसभा चुनाव के लिए मैदान में केवल तीन उम्मीदवार बचे हैं और तीनों भाजपा से हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस स्थिति में भाजपा उम्मीदवारों का निर्विरोध चुना जाना लगभग तय माना जा रहा है। इस बीच, चुनाव से पहले कांग्रेस ने अपने लगभग 48 विधायकों को बेंगलुरु भेज दिया है, जिसे पार्टी की रणनीतिक तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है।