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Consensus reached on the conversion dispute in Narayanpur; 26 families expelled from the village have returned home.
नारायणपुर। भरंडा गांव में मतांतरण को लेकर कई दिनों से जारी विवाद अब शांत होता नजर आ रहा है। प्रशासन की मध्यस्थता में दोनों पक्षों के बीच हुई बैठक के बाद सात महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बनी। इसके बाद गांव छोड़ने को मजबूर हुए 26 मतांतरित परिवार देर रात अपने घर वापस लौट आए। प्रशासन ने तय किया है कि अगले एक महीने तक हालात की लगातार समीक्षा की जाएगी और उसके बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा।
मंगलवार को गांव से बाहर किए गए 26 परिवारों के करीब 120 सदस्य पूरे दिन गांव की सीमा पर एक पेड़ के नीचे बैठे रहे। देर शाम प्रशासन की पहल पर दोनों पक्षों के बीच बातचीत सफल रही, जिसके बाद सभी परिवारों की गांव में वापसी हो गई।
जानकारी के अनुसार, विवाद की शुरुआत 7 जून को हुई थी, जब कोंडागांव निवासी पादरी दंपती दीपक ठाकुर और भुवनेश्वरी ठाकुर भरंडा गांव पहुंचे थे। ग्रामीणों का आरोप है कि पादरी दंपती लंबे समय से प्रार्थना सभाओं और हर्बल दवाओं के माध्यम से ग्रामीणों को प्रभावित कर मतांतरण के लिए प्रेरित कर रहे थे।
भरंडा के सरपंच सुकमु करंगा का दावा है कि गांव के 120 परिवारों में से 26 परिवार इस प्रभाव में आकर मतांतरित हो चुके हैं। इसी मुद्दे को लेकर नाराज ग्रामीणों ने पादरी दंपती के साथ मारपीट कर दी थी। सूचना मिलने पर पुलिस ने दोनों को सुरक्षित बाहर निकालकर थाने पहुंचाया।
9 जून के बाद मामला और अधिक गंभीर हो गया। आरोप लगाया गया कि मतांतरित लोगों की गतिविधियों और जनजातीय देवी-देवताओं को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों से गांव में तनाव बढ़ गया। पुलिस ने मामले में अपराध दर्ज कर 22 जून को पादरी दंपती दीपक ठाकुर और भुवनेश्वरी ठाकुर को गिरफ्तार किया। अदालत में पेश किए जाने के बाद दोनों को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।हालांकि गिरफ्तारी के बाद भी गांव का माहौल सामान्य नहीं हो पाया और 26 परिवारों को अस्थायी रूप से गांव छोड़ना पड़ा था।
स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, एसडीएम और तहसीलदार लगातार गांव में मौजूद रहे। प्रस्तावित विशेष ग्रामसभा से पहले प्रशासन ने दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर बातचीत कराई, जिसके बाद विवाद को शांत करने की दिशा में सहमति बनी।
गांव में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने में दोनों पक्ष प्रशासन का सहयोग करेंगे। कोई भी व्यक्ति या पक्ष माहौल बिगाड़ने या उकसाने वाली गतिविधि नहीं करेगा। आदिवासी समाज और मतांतरित परिवारों के बीच संवाद की प्रक्रिया जारी रखी जाएगी। आपसी मतभेद बातचीत के माध्यम से सुलझाने का प्रयास किया जाएगा। किसी भी तरह की अफवाह फैलाने से सभी लोग बचेंगे। प्रशासन समय-समय पर स्थिति की समीक्षा करेगा। एक माह बाद हालात का आकलन कर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
भरंडा गांव में मतांतरण को लेकर यह पहला विवाद नहीं है। इससे पहले जनवरी 2023 में भी इसी मुद्दे पर हिंसा की बड़ी घटना सामने आई थी। प्रशासन का कहना है कि इस बार दोनों पक्षों के सहयोग से स्थायी समाधान निकालने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।