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Consensus reached on three names for the post of Ram Mandir Trust CEO; panel to be sent after interviews of 18 candidates.
अयोध्या। अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। चयन समिति ने शॉर्टलिस्ट किए गए 18 उम्मीदवारों के इंटरव्यू पूरे कर लिए हैं। अब समिति सभी उम्मीदवारों के मूल्यांकन के बाद तीन नामों का पैनल तैयार कर ट्रस्ट को भेजेगी।
इस प्रक्रिया में तीन नाम प्रमुखता से सामने आए हैं। इनमें पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश कुमार पांडेय, पूर्व आईएएस अधिकारी दिनेश चंद्र और पूर्व आईएएस अधिकारी योगेश्वर राम मिश्र शामिल हैं।
पूर्व आईपीएस राजेश कुमार पांडेय करीब 32 वर्षों तक पुलिस सेवा में रहे हैं। उन्हें एक अनुभवी पुलिस अधिकारी के तौर पर जाना जाता है और वे एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के रूप में भी चर्चित रहे हैं। कानून-व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े मामलों में उनका लंबा अनुभव रहा है।
राम मंदिर परिसर की सुरक्षा और बड़े धार्मिक आयोजन के प्रबंधन को देखते हुए उनका अनुभव CEO पद के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पूर्व आईएएस अधिकारी दिनेश चंद्र सिंह जौनपुर के जिलाधिकारी रह चुके हैं। प्रशासनिक जिम्मेदारियों के दौरान उन्होंने कानून-व्यवस्था, विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़े मामलों को संभाला है।
उनका प्रशासनिक अनुभव राम मंदिर से जुड़े विभिन्न सरकारी और प्रशासनिक समन्वय के लिहाज से उपयोगी माना जा रहा है।
पूर्व आईएएस अधिकारी योगेश्वर राम मिश्र अयोध्या के जिलाधिकारी रह चुके हैं। इस वजह से उन्हें अयोध्या की प्रशासनिक व्यवस्था, स्थानीय परिस्थितियों और जिले से जुड़े विभिन्न पहलुओं की प्रत्यक्ष जानकारी है।
राम जन्मभूमि परिसर के विकास और अयोध्या में बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए उनका स्थानीय प्रशासन से जुड़ा अनुभव भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
चयन समिति अब तीन संभावित उम्मीदवारों का पैनल तैयार कर राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भेजेगी। इसके बाद ट्रस्ट अंतिम निर्णय लेगा। पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति के बाद मंदिर प्रशासन, विकास कार्यों, विभिन्न संस्थाओं के साथ समन्वय और व्यवस्थाओं को अधिक व्यवस्थित तरीके से संचालित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
इसी बीच राम मंदिर में रामलला की सेवा-पूजा करने वाले अर्चकों की वेशभूषा में भी बदलाव होने जा रहा है। मंदिर समिति ने सभी अर्चकों के लिए एक समान ड्रेस कोड निर्धारित किया है, जिसे 15 अगस्त से लागू किया जाएगा।
नए ड्रेस कोड के तहत गर्मी के मौसम में अर्चक पीतांबरी रेशमी धोती और उत्तरीय (अंगवस्त्र) धारण करेंगे। इससे सभी अर्चकों की वेशभूषा एकरूप और पारंपरिक दिखाई देगी।
ठंड के मौसम में अर्चकों के लिए पीले रंग के ऊनी वस्त्र निर्धारित किए गए हैं। खास बात यह है कि अर्चकों के ये वस्त्र सिले हुए नहीं होंगे। मंदिर समिति ने पारंपरिक स्वरूप को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था तय की है।
इस तरह राम मंदिर में एक ओर जहां पहले पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति की प्रक्रिया अंतिम चरण में है, वहीं दूसरी ओर रामलला की सेवा-पूजा से जुड़े अर्चकों की वेशभूषा में भी 15 अगस्त से एकरूपता देखने को मिलेगी।