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Controversy over the removal of 88,324 names from the electoral roll; Congress terms the Election Commission's affidavit 'misleading'.
नई दिल्ली। मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर निशाना साधा है। पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट में आयोग की ओर से दाखिल हलफनामे को भ्रामक और छलपूर्ण बताते हुए आरोप लगाया कि इसमें तथ्यों को अलग तरीके से पेश किया गया है। कांग्रेस के संचार महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि आयोग के दावों में विरोधाभास है और यह स्थिति उसके लिए भी नुकसानदेह साबित हो सकती है।
जयराम रमेश ने मंगलवार को आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने पहले दावा किया था कि फॉर्म-6 के साथ जोड़ी गई नई घोषणा को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया है। हालांकि, उनके मुताबिक बाद में अदालत ने इस दावे को खारिज कर दिया। कांग्रेस नेता ने आयोग के इस तर्क पर भी सवाल उठाया कि नई घोषणा अलग दस्तावेज है और फॉर्म-6 में कोई बदलाव नही किया गया। रमेश का कहना है कि इस अनिवार्य घोषणा को भरे बिना ऑनलाइन फॉर्म-6 जमा करना संभव नही है। ऐसे में इसे फॉर्म-6 से अलग बताना सही नही है।
रमेश ने कहा कि 26 सितंबर 2026 को चुनाव आयोग ने घोषणा-पत्र को फॉर्म-6 के साथ जोड़े जाने की बात कही थी, जबकि अब इसे फॉर्म-6 का हिस्सा मानने से इनकार किया जा रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि इस तरह के विरोधाभासी बयानों से नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल उठते है।पार्टी ने दावा किया कि केवल घोषणा-पत्र को अलग दस्तावेज बताने से रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960 के कथित उल्लंघन का मुद्दा समाप्त नही हो जाता।
मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान 88,324 नाम हटाए जाने का मुद्दा भी विवाद के केंद्र में है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इन नामों को हटाने के कारणों और संबंधित क्षेत्र का स्पष्ट विवरण नही दिया गया है। कांग्रेस ने एसआईआर प्रक्रिया और फॉर्म-6 से जुड़ी व्यवस्था पर सवाल उठाए है। चुनाव आयोग का पक्ष और अदालत में दाखिल हलफनामे का पूरा विवरण सामने आने पर मामले की स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।