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Tata Motors-Iveco Deal: Tata Motors acquires Italy’s Iveco for Rs 41,360 crore; set to become the world’s fourth-largest commercial vehicle (CV) company.
मुंबई। टाटा मोटर्स ने अपने वैश्विक कारोबार को विस्तार देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए इटली की कमर्शियल वाहन निर्माता कंपनी इवेको को खरीदने का सौदा पूरा करने की दिशा में अहम पड़ाव पार कर लिया है। करीब 3.9 अरब यूरो यानी 41,360 करोड़ रुपये के इस अधिग्रहण से टाटा मोटर्स का कमर्शियल वाहन कारोबार वैश्विक स्तर पर मजबूत होगा। सौदा पूरा होने के बाद कंपनी की सालाना वाहन बिक्री करीब 5.4 लाख तक पहुंचने और वह दुनिया की चौथी सबसे बड़ी कमर्शियल वाहन निर्माता बनने की उम्मीद है।
टेंडर ऑफर की समयसीमा समाप्त होने पर इवेको के 87.81 फीसदी शेयरधारकों ने अपने शेयर बेचने की सहमति दी। सौदे के लिए कम से कम 80 फीसदी हिस्सेदारी की मंजूरी जरूरी थी। शेयरों का निपटान 30 अक्टूबर को निर्धारित है। इसके बाद इवेको टाटा मोटर्स की सहायक कंपनी बन जाएगी और मिलान शेयर बाजार से हट जाएगी। दोनों कंपनियों के वित्तीय खातों का एकीकरण अगली तिमाही से शुरू होने की योजना है।जुलाई 2025 में घोषित इस सौदे को पूरा होने में करीब 15 महीने लगे। यह टाटा मोटर्स का अब तक का सबसे बड़ा अधिग्रहण और टाटा समूह की बड़ी विदेशी खरीद में से एक है। इससे पहले 2007 में टाटा स्टील ने कोरस का अधिग्रहण किया था।
इवेको के कुछ छोटे शेयरधारकों के विरोध के चलते टाटा मोटर्स को अपनी पेशकश की कीमत बढ़ानी पड़ी। शुरुआती ऑफर 14.1 यूरो प्रति शेयर था, जिसे बढ़ाकर 14.4 यूरो कर दिया गया। कुछ निवेशक 18 यूरो प्रति शेयर तक की मांग कर रहे थे, लेकिन टाटा मोटर्स ने 14.4 यूरो को अंतिम पेशकश बताया।
सौदे की कुल कीमत: 3.9 अरब यूरो यानी करीब 41,360 करोड़ रुपये
प्रति शेयर ऑफर: 14.4 यूरो यानी करीब 1,527 रुपये
प्रीमियम: जुलाई 2025 के भाव से लगभग 33.47 फीसदी अधिक
फंडिंग: करीब 40,300 करोड़ रुपये का ब्रिज लोन
शेयरों का निपटान: 30 अक्टूबर
सौदे से बाहर: इवेको का डिफेंस कारोबार
अधिग्रहण के बाद टाटा मोटर्स के कमर्शियल वाहन कारोबार की सालाना बिक्री करीब 5.4 लाख वाहनों तक पहुंच सकती है। कंपनी की संयुक्त सालाना आय लगभग 2.33 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2025-26 में टाटा मोटर्स की स्टैंडअलोन आय 77,399 करोड़ रुपये थी। इस आधार पर संयुक्त कारोबार की आय में करीब 201 फीसदी की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया जा रहा है।हालांकि, यह अनुमान अधिग्रहण के बाद दोनों कारोबार के प्रदर्शन और उनके वित्तीय एकीकरण पर निर्भर करेगा। यूरोप में मांग कमजोर होने की स्थिति में कंपनी की आय का बड़ा हिस्सा प्रभावित हो सकता है।
भारत में टाटा मोटर्स के कमर्शियल वाहन कारोबार की खुदरा बाजार हिस्सेदारी करीब 36 फीसदी बताई गई है। वहीं, इवेको की यूरोपीय संघ के ट्रक बाजार में लगभग 11 फीसदी हिस्सेदारी है। इवेको बस कारोबार में भी मजबूत स्थान रखती है। इसका मुख्यालय इटली के ट्यूरिन में रहेगा।इस अधिग्रहण से टाटा मोटर्स को यूरोप में ट्रक और बस बाजार तक सीधी पहुंच मिलेगी। कंपनी को नए ग्राहकों, डीलर नेटवर्क और उत्पादन सुविधाओं का लाभ मिल सकता है। साथ ही, अलग-अलग बाजारों में मौजूद तकनीक और उत्पादों को साझा करने के अवसर भी बनेंगे।
सौदे के लिए लिया गया करीब 40,300 करोड़ रुपये का ब्रिज लोन अस्थायी वित्तीय व्यवस्था है। इसे आगे लंबी अवधि के कर्ज में बदलना होगा। इसके अलावा, यूरोप में फैक्ट्रियों, डीलर नेटवर्क और कामकाज के तरीकों को टाटा मोटर्स के मौजूदा ढांचे से जोड़ना आसान नही होगा।यूरोप में वाहन मांग में उतार-चढ़ाव, लागत और दोनों कंपनियों के परिचालन में तालमेल इस सौदे की सफलता तय करने वाले अहम कारक होंगे।
टाटा समूह के विदेशी अधिग्रहणों का पुराना अनुभव
टाटा समूह ने पिछले दो दशकों में कई विदेशी कंपनियों का अधिग्रहण किया है। इनमें 2000 में ब्रिटेन की टेटली, 2004 में दक्षिण कोरिया की देवू और 2007 में कोरस की खरीद शामिल है। 2008 में टाटा मोटर्स ने जगुआर लैंड रोवर का अधिग्रहण किया था, जो समूह के वैश्विक कारोबार का अहम हिस्सा बना।हालांकि, हर अधिग्रहण का प्रदर्शन एक जैसा नही रहा। कोरस खरीदने के बाद टाटा स्टील के ब्रिटेन कारोबार को लंबे समय तक घाटे और परिचालन संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इवेको सौदे में भी टाटा मोटर्स के सामने अवसरों के साथ वित्तीय जोखिम और यूरोपीय बाजार में प्रदर्शन बनाए रखने की चुनौती रहेगी।