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Cracks appear on Bharatmala highway even before inauguration; questions raised over the ₹4,146 crore road project.
रायपुर। छत्तीसगढ़ में रायपुर-विशाखापत्तनम भारतमाला हाईवे का उद्घाटन अभी बाकी है, लेकिन इससे पहले ही सड़क पर दरारें सामने आने से निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। कांकेर जिले में सरगी और बासनवाही के बीच मौलीपारा के आसपास सड़क क्षतिग्रस्त होने का मामला सामने आया है। करीब 4,146 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस हाईवे के छत्तीसगढ़ हिस्से की लंबाई लगभग 125 किलोमीटर है।सड़क पर दरारें मिलने के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने जांच तेज कर दी है। दिल्ली मुख्यालय से अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची और सड़क की अलग-अलग परतों से नमूने लिए। प्रभावित हिस्से की मरम्मत करा दी गई है, लेकिन दरारें आने की असली वजह अभी स्पष्ट नहीं हुई है। मामले में निर्माण एजेंसी को नोटिस जारी किया गया है और तकनीकी जांच जारी है।
NHAI ने संबंधित निर्माण एजेंसी से जवाब तलब किया है। विभागीय जांच के साथ स्वतंत्र तकनीकी जांच भी कराई जा रही है। इसमें सड़क की मोटाई, निर्माण सामग्री और तय तकनीकी मानकों के पालन की पड़ताल की जाएगी।जांच के लिए करीब 15 तरह के तकनीकी परीक्षण प्रस्तावित हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय परीक्षण और अंशशोधन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (NABL) से मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला के माध्यम से भी नमूनों की जांच कराई गई है।फिलहाल दरारों के पीछे किसी एक कारण की पुष्टि नहीं हुई है। जांच रिपोर्ट से पता चलेगा कि सड़क क्षतिग्रस्त होने की वजह निर्माण सामग्री, परतों की मोटाई, कम्पैक्शन या कोई अन्य तकनीकी कारण है। जांच में कमी सामने आने पर निर्माण और गुणवत्ता निगरानी से जुड़ी जवाबदेही भी तय हो सकेगी।
हाईवे निर्माण के बीच आसपास के गांवों में आवागमन से जुड़ी समस्याएं भी सामने आई हैं। मालवीपारा पंचायत के किसानों का कहना है कि निर्माण के कारण उनके खेतों तक पहुंचने वाले पुराने रास्ते प्रभावित हुए हैं।किसान उत्तम साहू, देवेंद्र नेताम और लोखनाथ मंडावी ने खेतों तक पहुंचने में परेशानी होने की बात कही है। ग्रामीणों के मुताबिक, खेती-किसानी के लिए खेत तक पहुंचने का रास्ता जरूरी है, लेकिन निर्माण के दौरान आवाजाही की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
रायपुर-विशाखापत्तनम भारतमाला हाईवे छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में शामिल है। राज्य में इसके लगभग 125 किलोमीटर लंबे हिस्से के निर्माण पर 4,146 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।ऐसे में उद्घाटन से पहले सड़क पर दरारें मिलना निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। हालांकि, दरारों की वास्तविक वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल प्रभावित हिस्से की मरम्मत की जा चुकी है और तकनीकी रिपोर्ट का इंतजार है।
सड़क की गुणवत्ता और संरचनात्मक मजबूती का आकलन करने के लिए अलग-अलग परीक्षण किए जाते हैं। इनमें प्रमुख हैं:
- कोर कटिंग टेस्ट: सड़क से बेलनाकार नमूना निकालकर उसकी परतों की मोटाई और संरचना की जांच की जाती है। इससे पता चलता है कि निर्माण निर्धारित मानकों के अनुरूप हुआ या नहीं।
- बिटुमिन कंटेंट टेस्ट: सड़क निर्माण में इस्तेमाल डामर की मात्रा मापी जाती है। निर्धारित अनुपात से कमी या असंतुलन होने पर सड़क की मजबूती और टिकाऊपन प्रभावित हो सकता है।
- एग्रीगेट ग्रेडेशन टेस्ट: गिट्टी और पत्थरों के आकार तथा उनके अनुपात की जांच की जाती है। मिश्रण में गड़बड़ी होने पर सड़क की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
- फील्ड डेंसिटी और कम्पैक्शन टेस्ट: मिट्टी और सड़क की अन्य परतों के घनत्व की जांच होती है। इससे पता चलता है कि निर्माण के दौरान परतों को पर्याप्त दबाव देकर मजबूत किया गया या नहीं।
- फालिंग वेट डिफ्लेक्टोमीटर टेस्ट: सड़क पर नियंत्रित भार डालकर उसके झुकाव को मापा जाता है। इससे सड़क की संरचनात्मक मजबूती का आकलन करने में मदद मिलती है।
- रोड रफनेस टेस्ट: सड़क की सतह की समतलता और उतार-चढ़ाव की जांच की जाती है। इससे सड़क पर यात्रा की गुणवत्ता और सतह की स्थिति का पता चलता है।