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The grand conclusion of Durga Puja in Bilaspur...tableaux of Shiva-Sati, Khatu Shyam and Shravan Kumar captivated the hearts.
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े दुर्गोत्सव के समापन पर बिलासपुर में भव्य झांकियां निकाली गईं। भगवान शिव की बारात, शिव-सती, खाटू श्याम का दरबार, लड्डू गोपाल, भगवान जगन्नाथ और शिव की जटाओं से निकलती मां गंगा के मनमोहक स्वरूप ने श्रद्धालुओं का ध्यान खींचा। वहीं, माता-पिता की सेवा का संदेश देती श्रवण कुमार की झांकी भी आकर्षण का केंद्र रही।बुधवार शाम से शुरू हुआ दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन का सिलसिला गुरुवार सुबह 7 बजे तक चलता रहा। आकर्षक रोशनी, डीजे, धुमाल और ढोल-ताशों की धुन के बीच श्रद्धालु झांकियों के साथ आगे बढ़ते रहे। इन्हें देखने के लिए शहर की सड़कों पर भारी भीड़ जुटी। कई मार्गों पर 3 से 5 किलोमीटर तक जाम की स्थिति बनी रही।
इस बार की झांकियों में भगवान शिव की बारात खास आकर्षण रही। इसमें ब्रह्मा, विष्णु और भूतों को नृत्य करते हुए दिखाया गया। शिव-सती की झांकी ने भी लोगों का ध्यान खींचा। इसके अलावा भगवान जगन्नाथ के स्वरूप, खाटू श्याम के दरबार और लड्डू गोपाल की झांकियां देखने के लिए लोग देर रात तक जुटे रहे।गोंदिया से मां गंगा के उद्गम को दर्शाती भागीरथी की झांकी भी मंगाई गई थी। वहीं, लक्ष्मण के लिए संजीवनी बूटी लाने पहाड़ उठाकर जाते हनुमान के स्वरूप को भी आकर्षक तरीके से प्रस्तुत किया गया।
बिलासपुर में दुर्गा प्रतिमा स्थापना की परंपरा करीब 75 साल पुरानी बताई जाती है। वहीं, प्रतिमाओं के विसर्जन के दौरान आकर्षक झांकियां निकालने की परंपरा 48 साल से जारी है। नौ दिनों तक शहर के विभिन्न पंडालों में माता की पूजा-अर्चना हुई। दशहरे के दूसरे दिन बुधवार को श्रद्धालुओं ने नम आंखों से माता को विदाई दी।शहर की अलग-अलग दुर्गा समितियां अपनी प्रतिमाओं और झांकियों के साथ सड़कों पर उतरीं। देवकीनंदन चौक, सिम्स चौक और हटरी चौक से होते हुए झांकियां पचरीघाट पहुंचीं। पूरी रात प्रतिमाओं के विसर्जन का क्रम जारी रहा। इसके अलावा छठघाट पर भी प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया।
मध्य नगरी दुर्गोत्सव समिति ने आयोजन के 50वें साल को खास बनाने के लिए माता के आगमन से लेकर विदाई तक विशेष तैयारियां की थीं। समिति की शिव-सती झांकी प्रमुख आकर्षण रही, जिसमें माता के 51 स्वरूपों को दर्शाया गया था। समिति के सदस्यों के मुताबिक, यह झांकी राजनांदगांव से मंगाई गई थी।गोंदिया से मां गंगा के उद्गम को दर्शाने वाली भागीरथी की झांकी भी लाई गई थी। इसके साथ ही युवाओं को माता-पिता की सेवा के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से श्रवण कुमार की झांकी निकाली गई।
झांकियों को आकर्षक लाइटिंग से सजाया गया था। डीजे, धुमाल और ढोल-ताशों की धुन पर श्रद्धालु नाचते-गाते आगे बढ़ते रहे। इसके लिए जबलपुर, राजनांदगांव और गोंदिया से भी झांकियां मंगाई गई थीं। प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए बैंड और धुमाल दलों ने आयोजन में उत्साह बढ़ाया।बिलासपुर के अलावा आसपास के गांवों और रायपुर, कोरबा, मुंगेली तथा जांजगीर-चांपा से भी लोग झांकियां देखने पहुंचे। अलग-अलग समाजों और संगठनों ने जगह-जगह मंच लगाकर दुर्गा समितियों का स्वागत किया।
दुर्गोत्सव के समापन पर बंगाली समाज की महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ माता को विदाई दी। विनोबा नगर, तोरवा सहित विभिन्न क्षेत्रों के मंदिरों और बंगाली पंडालों में महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर सिंदूर खेला की रस्म निभाई।साईं परिसर में भी शारदीय नवरात्रि के दौरान षष्ठी से नवमी तक दुर्गा पूजा महोत्सव आयोजित किया गया। दशमी पर सिंदूर खेला के साथ विजयादशमी मनाई गई। महोत्सव में माता की चौकी, गरबा और बच्चों व महिलाओं के सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए। महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना की।
झांकियों को देखने के लिए शहर के प्रमुख मार्गों पर देर रात तक लोगों का जमावड़ा लगा रहा। देवकीनंदन चौक से गांधी चौक और पुराना बस स्टैंड से तेलीपारा, गोंडपारा, सदरबाजार तथा जूना बिलासपुर तक भारी भीड़ दिखाई दी।कई जगहों पर इतनी भीड़ रही कि पैदल निकलना भी मुश्किल हो गया। झांकियों के साथ आगे बढ़ती दुर्गा समितियों और दर्शन के लिए पहुंचे लोगों के कारण कई मार्गों पर यातायात प्रभावित हुआ। देर रात से गुरुवार सुबह तक शहर में दुर्गोत्सव की रौनक बनी रही।