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Critically ill patients at Ambedkar Hospital will no longer have to wait for a slip; treatment will begin immediately.
रायपुर। आंबेडकर अस्पताल में पर्ची बनवाने के इंतजार के दौरान महिला मरीज की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन ने गंभीर मरीजों के लिए नई व्यवस्था लागू की है। अब गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को पंजीयन काउंटर पर कतार में खड़े होने की जरूरत नहीं होगी। उन्हें सीधे सीएमओ कार्यालय भेजा जाएगा, जहां डॉक्टर मरीज की स्थिति का आकलन कर उसे संबंधित वार्ड में भेजेंगे। मरीज के उपचार के साथ उसकी पर्ची बनाने की प्रक्रिया भी जारी रहेगी।
बुधवार को उरला निवासी दुर्गेश साहू अपनी पत्नी अश्विनी बाई साहू को इलाज के लिए आंबेडकर अस्पताल लेकर पहुंचे थे। पर्ची बनवाने की प्रक्रिया के दौरान महिला की मौत हो गई। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने गंभीर मरीजों के लिए तत्काल उपचार की व्यवस्था को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया।अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि गंभीर स्थिति वाले मरीज का इलाज केवल पंजीयन की प्रक्रिया के कारण रोकना उचित नहीं है। ऐसे मरीजों को पहले चिकित्सकीय सहायता मिलनी चाहिए।
हालांकि, नई व्यवस्था के साथ अस्पताल के सामने मेडिकल रिकार्ड से जुड़ी चुनौती भी है। मेडिकल-लीगल केस, दुर्घटना या अन्य गंभीर घटनाओं में पर्ची और उस पर दर्ज समय महत्वपूर्ण होता है। इससे यह प्रमाणित होता है कि मरीज अस्पताल में किस समय पहुंचा था।यदि मरीज का उपचार पर्ची बनने से पहले शुरू हो जाता है और इस दौरान उसकी मौत हो जाती है तो अस्पताल पहुंचने का सही समय दर्ज करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसी स्थिति में ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर के सामने कानूनी सवाल भी खड़े हो सकते हैं।
नई व्यवस्था की जानकारी मरीजों और उनके स्वजन तक पहुंचाने के लिए अस्पताल परिसर में स्टैंडी और पोस्टर लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा सीएमओ कार्यालय के पास दोपहर दो बजे तक एक कर्मचारी तैनात रहेगा। वह गंभीर मरीजों की पहचान कर उन्हें तत्काल सीएमओ कार्यालय तक पहुंचाने में मदद करेगा।अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि गंभीर मरीजों के इलाज में देरी रोकना प्राथमिकता है। इसलिए ऐसी सूचना प्रदर्शित की जा रही है, जिससे मरीज और उनके स्वजन नई व्यवस्था को समझ सकें और गंभीर स्थिति में पर्ची के लिए कतार में न लगें।
नई व्यवस्था में डॉक्टरों को मरीज का इलाज तत्काल शुरू करने के साथ ही उसके अस्पताल पहुंचने का समय और जरूरी चिकित्सकीय जानकारी भी दर्ज करनी होगी। इससे एक ओर मरीज को उपचार के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा, वहीं दूसरी ओर चिकित्सा रिकार्ड तैयार रखने की प्रक्रिया भी बनी रहेगी।आंबेडकर अस्पताल के अधीक्षक डा. संतोष सोनकर ने कहा कि गंभीर मरीजों का इलाज तत्काल किया जा रहा है। व्यवस्था में देरी न हो, इसके लिए अस्पताल में सूचना लगाई जा रही है, ताकि मरीज और उनके स्वजन पर्ची के लिए इंतजार न करें।