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Tehsildar lacks the authority to impose restrictions on residential land... High Court quashes Revenue Board's order as well.
बिलासपुर। रिहायशी जमीन और स्थायी निर्माण से जुड़े विवाद में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी पक्ष को निर्माण या अन्य गतिविधि से रोकने के लिए निषेधाज्ञा जारी करना राजस्व न्यायालय के अधिकार क्षेत्र का विषय नहीं है। ऐसे मामलों में जमीन के टाइटल और निषेधाज्ञा से संबंधित दावों का निर्णय सक्षम सिविल कोर्ट ही कर सकता है।जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की अदालत ने लक्ष्मण माणिकपुरी और उत्तरा माणिकपुरी की याचिका स्वीकार करते हुए बिलासपुर तहसीलदार का 20 जून 2022 का आदेश निरस्त कर दिया। इसी के आधार पर राजस्व मंडल बिलासपुर द्वारा 18 सितंबर 2025 को पारित आदेश को भी कोर्ट ने रद्द कर दिया।
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि तहसीलदार ने ऐसी कार्यवाही की, जिसके लिए उसके पास वैधानिक अधिकार क्षेत्र नहीं था। याचिकाकर्ताओं ने यह भी आपत्ति जताई कि एक अक्टूबर 2020 के बाद तहसीलदार द्वारा मैनुअल तरीके से की गई कार्रवाई शासन के 15 जून 2020 के परिपत्र के अनुरूप नहीं थी।राजस्व मंडल की कार्यवाही के दौरान अध्यक्ष की सील के कथित इस्तेमाल को लेकर भी याचिकाकर्ताओं ने सवाल उठाए थे।
सुनवाई के दौरान अधिवक्ताओं ने हाई कोर्ट के सात सितंबर 2026 के एक अन्य फैसले 'नीरज जैन एवं अन्य बनाम छत्तीसगढ़ राज्य एवं अन्य' का हवाला दिया। बताया गया कि उस मामले में भी रिहायशी संपत्ति से संबंधित विवाद में राजस्व न्यायालय के अधिकार क्षेत्र का प्रश्न सामने आया था।हाई कोर्ट ने उस फैसले में स्पष्ट किया था कि स्थायी निर्माण वाले मकान या रिहायशी जमीन के संबंध में निषेधाज्ञा जारी करने का अधिकार राजस्व न्यायालय को नहीं है। ऐसे मामलों में टाइटल और निषेधाज्ञा से संबंधित विवाद सिविल कोर्ट के समक्ष तय किए जाने हैं।
मौजूदा मामले में हाई कोर्ट ने पाया कि तहसीलदार के समक्ष शुरू की गई मूल कार्यवाही ही उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर थी। ऐसे में उस कार्यवाही के आधार पर राजस्व मंडल द्वारा पारित आदेश को भी कायम नहीं रखा जा सकता।कोर्ट ने तहसीलदार की पूरी कार्यवाही और 20 जून 2022 के आदेश के साथ राजस्व मंडल का 18 सितंबर 2025 का आदेश भी निरस्त कर दिया।
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस फैसले में जमीन के स्वामित्व, टाइटल या कब्जे से जुड़े दावों के गुण-दोष पर कोई राय नहीं दी गई है। इन विवादों का निर्णय सक्षम न्यायालय में ही होगा। संबंधित पक्ष कानून के तहत उपलब्ध उचित कानूनी उपाय अपनाने के लिए स्वतंत्र हैं।जहां तक राजस्व मंडल की कार्यवाही में अध्यक्ष की सील के कथित इस्तेमाल और उससे जुड़े प्रशासनिक सवालों का संबंध है, कोर्ट ने इस पर अलग से निर्णय देना आवश्यक नहीं माना, क्योंकि मूल कार्यवाही को ही अधिकार क्षेत्र के अभाव में निरस्त कर दिया गया है।