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Double blow for Trump in US midterm elections; Democrats secure majority in both chambers of Congress
नई दिल्ली। अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा नुकसान हुआ है। विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी ने संसद के दोनों सदनों यानी प्रतिनिधि सभा और सीनेट में बहुमत हासिल कर लिया है। इसके साथ ही ट्रंप के लिए अपने बचे हुए दो साल के कार्यकाल में विधेयक पारित कराना और बड़े नीतिगत फैसलों को आगे बढ़ाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। अब कांग्रेस में डेमोक्रेट्स की मजबूत स्थिति के कारण राष्ट्रपति के फैसलों पर निगरानी और रोक लगाने की उनकी क्षमता बढ़ेगी।इन नतीजों को ट्रंप की नीतियों के प्रति मतदाताओं की नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है। खासतौर पर ईरान के साथ युद्ध, महंगाई और आर्थिक मुश्किलों को लेकर लोगों में असंतोष था। रिपब्लिकन पार्टी को कई ऐसे क्षेत्रों में भी हार का सामना करना पड़ा, जहां उसके उम्मीदवार लगातार जीतते रहे थे।
20 साल बाद सत्तारूढ़ दल ने दोनों सदनों में गंवाया बहुमत
मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेट्स की जीत को पिछले दो दशक की बड़ी राजनीतिक घटनाओं में गिना जा रहा है। इससे पहले वर्ष 2006 में राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के कार्यकाल के दौरान सत्तारूढ़ रिपब्लिकन पार्टी ने दोनों सदनों में बहुमत खोया था। इससे पहले 1946, 1954 और 1994 में भी तत्कालीन राष्ट्रपतियों के कार्यकाल में उनकी पार्टियों को दोनों सदनों में हार का सामना करना पड़ा था।चुनाव के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेट्स को 229 और रिपब्लिकन को 139 सीटें मिली हैं। 67 सीटों के नतीजे बाकी बताए गए हैं। सीनेट में डेमोक्रेट्स को 54 और रिपब्लिकन को 44 सीटें मिली हैं, जबकि दो सीटों पर परिणाम आने बाकी हैं।
ईरान युद्ध को हार की वजह मान रहे ट्रंप
डोनाल्ड ट्रंप ने चुनावी नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए हार स्वीकार की। उन्होंने कहा कि उनका नाम बैलेट पर नहीं था। अगर वे खुद चुनाव मैदान में होते तो रिपब्लिकन पार्टी भारी बहुमत से जीतती। उन्होंने डेमोक्रेट्स को जीत की बधाई भी दी और देश के हित में उनके साथ काम करने की बात कही।मीडिया को दिए साक्षात्कार में ट्रंप ने ईरान युद्ध को भी हार की एक वजह माना। दूसरी ओर, ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गलीबाफ ने नतीजों को युद्ध के खिलाफ अमेरिकी जनता की नाराजगी से जोड़ते हुए कहा कि लोगों ने अपनी राय जाहिर कर दी है।
ट्रंप ने वीटो इस्तेमाल करने की दी चेतावनी
संसद में बहुमत गंवाने के बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर वीटो लिखी लाल टोपी की तस्वीर पोस्ट की। उन्होंने संकेत दिया कि अगर डेमोक्रेट्स उनके साथ सहयोग नहीं करेंगे तो वे संसद से पारित विधेयकों पर वीटो का इस्तेमाल कर सकते हैं।अमेरिकी राष्ट्रपति के पास कांग्रेस से पारित विधेयकों को वीटो करने का अधिकार है। हालांकि, कांग्रेस विशेष बहुमत के जरिए राष्ट्रपति के वीटो को निष्प्रभावी भी कर सकती है। ऐसे में आने वाले समय में व्हाइट हाउस और कांग्रेस के बीच टकराव की स्थिति बन सकती है।
ट्रंप के फैसलों और नियुक्तियों पर बढ़ेगी निगरानी
कांग्रेस में डेमोक्रेट्स का बहुमत होने से ट्रंप प्रशासन के कई फैसलों की जांच और समीक्षा का रास्ता खुल सकता है। सरकारी खर्च, नियुक्तियों और प्रशासनिक नीतियों पर संसद की निगरानी बढ़ने की संभावना है। इसके अलावा ट्रंप के परिवार से जुड़े कारोबारी सौदों और अन्य विवादित मामलों को लेकर भी डेमोक्रेट्स जांच की मांग उठा सकते हैं।हालांकि, राष्ट्रपति को पद से हटाने के लिए महाभियोग की प्रक्रिया में सीनेट में दो-तिहाई बहुमत जरूरी होता है। मौजूदा चुनावी नतीजों के आधार पर डेमोक्रेट्स के पास यह संख्या नहीं है। ट्रंप अपने पहले कार्यकाल में 2019 और 2021 में महाभियोग की प्रक्रिया का सामना कर चुके हैं।
भारत के लिए क्या बदल सकता है?
अमेरिका में सत्ता संतुलन बदलने का असर भारत से जुड़े कई मुद्दों पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, कांग्रेस में डेमोक्रेट्स की मजबूत स्थिति के बाद ट्रंप प्रशासन के लिए एच-1बी वीजा नियमों को और सख्त करना या ग्रीन कार्ड प्रक्रिया में बदलाव करना आसान नहीं होगा। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से जुड़े मामलों में भी कांग्रेस की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।हालांकि, रूस से भारत की तेल खरीद पर अमेरिकी टैरिफ के मामले में तत्काल राहत मिलने की संभावना स्पष्ट नहीं है। इसकी वजह यह है कि टैरिफ से संबंधित विधेयक को दोनों दलों का समर्थन मिला हुआ बताया गया है।
ईरान युद्ध और चीन-रूस नीति पर भी असर संभव
डेमोक्रेटिक पार्टी के कई नेता ईरान के साथ युद्ध का विरोध करते रहे हैं। संसद में बहुमत मिलने के बाद युद्ध के लिए अतिरिक्त धनराशि मंजूर कराने में ट्रंप प्रशासन को मुश्किल हो सकती है। हालांकि, राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रपति के अधिकारों के आधार पर सैन्य कार्रवाई जारी रखने का रास्ता भी मौजूद रहेगा।चीन और रूस के साथ अमेरिका के संबंधों पर भी संसद के नए समीकरणों का असर पड़ सकता है। व्यापार, रक्षा और यूक्रेन युद्ध से जुड़े मुद्दों पर ट्रंप प्रशासन को विपक्षी सांसदों के सवालों का सामना करना पड़ सकता है।
छह भारतवंशियों ने दर्ज की जीत
मध्यावधि चुनाव में भारतीय मूल के छह उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है। इनमें पिया डांडिया, सुहास सुब्रमण्यम, रो खन्ना, अमी बेरा, प्रमिला जयपाल और अरुणा मिलर शामिल हैं। ये सभी डेमोक्रेटिक पार्टी से जुड़े हैं। पिया डांडिया ने फ्लोरिडा से जीत दर्ज कर राज्य से प्रतिनिधि सभा में पहुंचने वाली पहली भारतीय-अमेरिकी बनने का गौरव हासिल किया।वहीं, रिपब्लिकन पार्टी से जुड़े भारतीय मूल के विवेक रामास्वामी ओहायो के गवर्नर पद का चुनाव हार गए। ट्रंप के करीबी माने जाने वाले रामास्वामी के अलावा प्रतिनिधि सभा के चुनाव में उतरी सरिता कोमाटिरेड्डी और महेश मैक्स गणोरकर को भी हार का सामना करना पड़ा। निर्दलीय उम्मीदवार शिवा अय्यादुरई भी जीत हासिल नहीं कर सके।
शेयर बाजार में भी दिखा चुनावी नतीजों का असर
चुनाव परिणामों के बाद अमेरिकी बाजार में अलग-अलग क्षेत्रों की कंपनियों के शेयरों में उतार-चढ़ाव देखा गया। एआई डेटा सेंटर कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई, जबकि स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र की कंपनियों के शेयरों में तेजी दर्ज हुई। अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट, अल्फाबेट और एपल के शेयरों में उछाल आया। इसके उलट स्पेसएक्स और टेस्ला के शेयरों के साथ रक्षा कंपनियों के शेयर भी नीचे आए। तेल की कीमतों में करीब नौ प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।