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Due to a recruitment scam in vocational education, 499 schools have been without instructors for two and a half years.
समग्र शिक्षा के तहत प्रदेश के सरकारी स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा लागू करने की योजना अफसरों की उदासीनता, भ्रष्टाचार और लेन-देन के खेल में उलझकर रह गई है। ढाई साल पहले 652 सरकारी स्कूलों में व्यावसायिक पाठ्यक्रम के नए ट्रेड शुरू किए गए थे, जिनमें प्रति स्कूल दो-दो व्यावसायिक प्रशिक्षकों यानि वीटी की नियुक्ति होनी थी। हालांकि इनकी नियुक्ति के लिए प्रयास भी किए जा रहे थे लेकिन पिछले साल भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और लेन-देन के गंभीर आरोप लगने के बाद इसे बीच में ही रोक दिया गया। अभी स्थिति यह है, कि 499 हाई-हायर सेकेंडरी स्कूलों में अब तक प्रशिक्षकों की नियुक्ति नहीं हो पाई है।
इस संबंध में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा है, कि जल्द ही भर्ती कर ली जाएगी। इस मामले में 13 सितम्बर 2025 को स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव के निर्देश पर भ्रष्टाचार की शिकायत के आधार पर एफआइआर की प्रक्रिया शुरू की गई थी। पुलिस जांच के दौरान शिकायतकर्ताओं ने अपनी शिकायतें वापस ले लीं, जिसके आधार पर पुलिस ने मामले में क्लीन चिट दे दी। इस मामले में चौंकाने वाली बात यह है, कि पुलिस से क्लीन चिट मिलने के बाद पुरानी भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के बजाय स्कूल शिक्षा विभाग फिर से नए सिरे से निविदा यानि री-टेंडरिंग जारी करने का खेल रच रहा है।
इस री-टेंडरिंग की प्रक्रिया से वर्ष 2014-15 से कार्यरत व्यावसायिक प्रशिक्षकों में गहरा असंतोष है। उनका कहना है, कि यदि वोकेशनल ट्रेनिंग पार्टनर यानी वीटीपी बदलता है, तो वर्षों से सेवाएं दे रहे प्रशिक्षकों की नौकरी पर खतरा मंडराने लगेगा। इसके अलावा प्रशिक्षकों को दो महीने का वेतन भी अब तक नहीं दिया गया है। इसके साथ ही निजी सीए के माध्यम से प्रशिक्षकों के बिलों का सत्यापन कराया जा रहा है।
इस योजना के तहत तैयार किए गए इन्फ्रास्ट्रक्चर यानि संसाधनों की बात करें तो योजना की शुरुआत में 652 स्कूलों में लैब, लाइब्रेरी और शिक्षण सामग्री के लिए लगभग 40 करोड़ के उपकरण भेजे गए थे। प्रशिक्षकों के न होने से ये बहुमूल्य उपकरण धूल फांक रहे हैं और शो-पीस बनकर रह गए हैं। इन कोर्सों में बच्चों ने उत्साहपूर्वक दाखिला तो ले लिया, लेकिन मार्गदर्शन देने वाले शिक्षक ही उपलब्ध नहीं हैं। रोजगारोन्मुखी शिक्षा देने का केन्द्र सरकार का उद्देश्य सिर्फ कागजों तक ही सीमित है। पिछले साल विद्यार्थियों ने बीच सत्र में व्यावसायिक शिक्षा छोड़कर संस्कृत विषय में प्रवेश ले लिया था।
आपको बता दें, कि प्रदेश में एक हजार के अधिक स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा पाठ्यक्रम लागू है। केन्द्र सरकार ने वर्ष 2025 तक 50 प्रतिशत स्कूलों में व्यावसायिक पाठ्यक्रम लागू करने के लक्ष्य तय किया था। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत छात्र-छात्राओं को कक्षा 6वीं से ही व्यावसायिक शिक्षा से जोड़ने का प्रावधान है, जिसके लिए एनसीईआरटी, एआइसीटीई, यूजीसी और एनसीवीटी को फ्रेमवर्क तैयार करने का दायित्व सौंपा गया था। उम्मीद यह थी, कि शैक्षणिक सत्र 2024-25 से यह व्यवस्था धरातल पर उतरेगी, लेकिन छत्तीसगढ़ में विभागीय लेट-लतीफी और भर्ती विवादों के चलते यह महत्वाकांक्षी योजना अधर में लटकी हुई है।