

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

Fear looms large on campus, with dogs and monkeys weighing heavily on student safety.
बिलासपुर। उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई के बीच अब छात्रों को एक नई चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। शहर के विश्वविद्यालय और कॉलेज कैंपस में आवारा कुत्तों और बंदरों की बढ़ती मौजूदगी ने सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इस मुद्दे पर अब विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने सख्ती दिखाते हुए सभी संस्थानों से जवाब मांगा है।
यूजीसी का सख्त रुख, पूछा अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए
यूजीसी ने देशभर के विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों को निर्देश जारी कर कैंपस में आवारा जानवरों से निपटने के लिए किए गए उपायों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने साफ किया है कि केवल कुत्तों को हटाना ही काफी नहीं, बल्कि नसबंदी, टीकाकरण और स्थानीय निकायों के साथ समन्वय भी जरूरी है।
छात्रों में अब भी डर, हॉस्टल और सुनसान इलाकों में ज्यादा खतरा
भले ही प्रशासन सुरक्षा के दावे कर रहा हो, लेकिन जमीनी स्थिति कुछ और ही कहानी बयां करती है। छात्र बताते हैं कि हॉस्टल, स्टाफ क्वार्टर्स और सुनसान क्षेत्रों में सुबह और शाम के समय कुत्तों का झुंड दिखाई देता है, जिससे भय का माहौल बना रहता है।
प्रमुख विश्वविद्यालयों में क्या है हालात
गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के विशाल कैंपस में कुत्तों की संख्या पहले से कम जरूर हुई है, लेकिन बंदरों की सक्रियता अब भी बनी हुई है। हरियाली और तालाब के कारण बाहरी जीवों की आवाजाही यहां आम है।अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय प्रशासन का दावा है कि परिसर पूरी तरह सुरक्षित है और नियमित निगरानी की जा रही है, लेकिन छात्रों की चिंता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।वहीं पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय में चारदीवारी, सुरक्षा गार्ड और निगरानी व्यवस्था के बाद स्थिति पहले से बेहतर बताई जा रही है, हालांकि पूरी तरह समाधान अभी भी बाकी है।
कागजों में सुधार, जमीन पर चुनौती बरकरार
जिले में 50 से अधिक कॉलेज और कई विश्वविद्यालयों में करीब 2.20 लाख छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। ऐसे में सुरक्षा को लेकर थोड़ी सी चूक भी बड़ा खतरा बन सकती है। प्रशासनिक स्तर पर दावे किए जा रहे हैं, लेकिन छात्रों के अनुभव बता रहे हैं कि समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
सुरक्षा बनाम लापरवाही, अब कार्रवाई का इंतजार
यूजीसी के निर्देशों के बाद अब सभी संस्थानों पर जवाबदेही तय हो गई है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि विश्वविद्यालय केवल कागजी जवाब देते हैं या वास्तव में छात्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता बनाते हैं।