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रायपुर, 9 मार्च 2026। कांकेर वनमंडल में अवैध शिकार और वन्यजीव तस्करी के खिलाफ वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपियों को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत मामला दर्ज कर न्यायालय के आदेश पर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। इस कार्रवाई को क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण के लिए अहम कदम माना जा रहा है।
गोपनीय सूचना पर शुरू हुई कार्रवाई
वन विभाग के अनुसार, 8 मार्च 2026 की सुबह राज्य स्तरीय उड़नदस्ता को गोपनीय सूचना मिली थी कि इलाके में जंगली सुअरों का अवैध शिकार किया जा रहा है। सूचना मिलते ही कांकेर वन विभाग ने तत्काल टीम गठित कर अलग-अलग स्थानों पर जांच और घेराबंदी शुरू कर दी।
जंगली सुअर का मांस पकाते मिले आरोपी
जांच के दौरान महेंद्र कोड़ोपी के घर के पीछे बाड़ी में दो जंगली सुअरों—एक नर (74 किलोग्राम) और एक मादा (70 किलोग्राम)—को पैरा जलाकर भुना जा रहा था। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि यह मांस ग्राम जुनवानी निवासी प्रकाश मंडावी से 300 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदा गया था और वाहन के जरिए देवकोंगेरा लाया गया था। मौके से जंगली सुअर का मांस और अन्य सामग्री जब्त कर वन अपराध प्रकरण दर्ज किया गया।
घेराबंदी में पकड़ा गया जिंदा जंगली सुअर
इसी दौरान ग्राम माटवाड़ा (मोदी) के पास घेराबंदी कर वन विभाग की टीम ने पैशन प्रो मोटरसाइकिल (सीजी 19-बी-8847) को रोका। वाहन में सवार विष्णु सलाम और कृष्णा कोमरा एक जीवित मादा जंगली सुअर (लगभग 53 किलोग्राम) को चारों पैर और मुंह बांधकर ले जा रहे थे। पूछताछ में उन्होंने बताया कि यह जंगली सुअर भी प्रकाश मंडावी से खरीदा गया था।
वन्यजीव संरक्षण के लिए सख्ती जारी
वन विभाग ने ग्राम जुनवानी में भी छापेमारी कर जंगली सुअर के सिर और मांस के अन्य हिस्से बरामद किए। सभी मामलों में अवैध शिकार के तहत सात आरोपियों को गिरफ्तार कर 8 मार्च 2026 को कांकेर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि इस कार्रवाई से क्षेत्र में वन्यजीवों के अवैध शिकार और तस्करी पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।