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Grant of ₹20,000 for newly enrolled lawyers; High Court directs expediting the process.
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने नव-नामांकित अधिवक्ताओं को एकमुश्त 20 हजार रुपये की सहायता राशि देने की प्रस्तावित योजना पर राज्य सरकार से निर्णय प्रक्रिया में तेजी लाने की अपेक्षा जताई है। वहीं, शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया को लेकर भी सरकार से जवाब तलब करते हुए गरीब बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने पर चिंता व्यक्त की है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ के समक्ष राज्य सरकार ने शपथपत्र पेश कर बताया कि 2 मार्च 2026 को छत्तीसगढ़ स्टेट बार काउंसिल ने नए पंजीकृत अधिवक्ताओं को प्रारंभिक आवश्यकताओं, जैसे कानून की किताबें, टेबल और कुर्सी खरीदने के लिए 20 हजार रुपये का एकमुश्त अनुदान देने का प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजा था।
सरकार ने बताया कि वित्त विभाग ने इस प्रस्ताव को राज्य मंत्रिपरिषद के समक्ष रखने की सलाह दी है। साथ ही उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, ओडिशा और झारखंड में संचालित समान योजनाओं की जानकारी भी मंगाई गई है। हाईकोर्ट ने सरकार के आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए उम्मीद जताई कि आवश्यक जानकारी जल्द जुटाकर प्रस्ताव को बिना अनावश्यक विलंब के कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर को होगी।
RTE के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश को लेकर चल रही जनहित याचिका की सुनवाई में राज्य सरकार ने विस्तृत हलफनामा पेश किया। सरकार ने बताया कि दूसरी चरण की लॉटरी पूरी हो चुकी है, जिसमें 1174 बच्चों का चयन किया गया है। शेष सीटों को भरने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार और अभिभावकों की सहायता की जाएगी तथा प्रवेश प्रक्रिया अगस्त तक जारी रहेगी।
इस पर हाईकोर्ट ने सवाल उठाया कि जब शैक्षणिक सत्र अप्रैल से शुरू हो चुका है तो गरीब बच्चे पढ़ाई कब शुरू करेंगे और उनका पाठ्यक्रम कैसे पूरा होगा। कोर्ट ने पूछा कि क्या राज्य सरकार इसके लिए कोई विशेष व्यवस्था करेगी।
शासन ने बताया कि 6 जुलाई 2026 को प्रदेश के सभी 33 जिलों में आरटीई के तहत रिक्त सीटों के लिए दूसरी लॉटरी निकाली गई। कुल 9984 सीटों के लिए 12,934 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 1174 बच्चों का चयन किया गया। चयनित विद्यार्थियों का प्रवेश 8 से 17 जुलाई तक कराया गया।
राज्य सरकार ने यह भी बताया कि निजी गैर-अनुदान प्राप्त स्कूलों को आरटीई के तहत प्रवेश देने के एवज में 339 करोड़ 73 लाख 36 हजार रुपये की प्रतिपूर्ति राशि वर्ष 2024-25 और 2025-26 के लिए स्वीकृत कर लोक शिक्षण संचालनालय के खाते में हस्तांतरित कर दी गई है। सरकार ने निजी स्कूलों की प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने की मांग को खारिज करते हुए कहा कि वर्तमान राशि पर्याप्त है और इसमें वृद्धि की आवश्यकता नहीं है।