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High Court Verdict: Setting separate cut-offs for CTET and CGTET is entirely valid.
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने शिक्षक भर्ती से जुड़े अहम मामले में स्पष्ट किया है कि केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा सीटेट और राज्य शिक्षक पात्रता परीक्षा सीजीटेट के लिए अलग-अलग कटऑफ अंक निर्धारित करना पूरी तरह वैध है। अदालत ने कहा कि कटऑफ तय करना सरकार का नीतिगत फैसला है और इसमें न्यायालय तभी हस्तक्षेप करेगा, जब निर्णय मनमाना या कानून के खिलाफ हो। इस आधार पर दायर याचिका को खारिज कर दिया गया।
मामले में याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि सहायक शिक्षक भर्ती के लिए सीटेट और सीजीटेट के प्राप्तांकों में अंतर होने के बावजूद दोनों परीक्षाओं को समान मानते हुए अलग कटऑफ तय करना अनुचित है। उनका कहना था कि इससे अभ्यर्थियों के साथ समानता का व्यवहार नहीं हुआ।
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि राज्य सरकार ने अपनी भर्ती नीति के तहत विभिन्न वर्गों के लिए अलग पात्रता मानक तय किए हैं। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि सीजीटेट में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और दिव्यांग अभ्यर्थियों को 10 प्रतिशत तक की छूट दी गई है, जबकि सीटेट में यह छूट 5 प्रतिशत है। ऐसे में दोनों परीक्षाओं के लिए अलग कटऑफ तय करना न तो भेदभावपूर्ण है और न ही असंवैधानिक।
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने अपने पूर्व के निर्णय का भी उल्लेख किया और कहा कि भर्ती से जुड़े नीतिगत मामलों में सरकार को निर्णय लेने का अधिकार है। अदालत ने इसी आधार पर याचिका को खारिज करते हुए पहले दिए गए फैसले को लागू माना।
एक अन्य मामले में हाई कोर्ट ने प्रदेश के मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की भर्ती से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग सीजीपीएससी को पक्षकार बनाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने आयोग को भर्ती विज्ञापन जारी करने और अगली सुनवाई से पहले हलफनामा पेश करने को कहा है। स्वास्थ्य विभाग ने अदालत को बताया कि छह विशेषज्ञ पदों की भर्ती प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है।
हाई कोर्ट ने एक अन्य फैसले में कहा कि चयनित अभ्यर्थी के पदभार ग्रहण करते ही प्रतीक्षा सूची का अधिकार समाप्त हो जाता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वेटिंग लिस्ट भविष्य की रिक्तियों पर दावा करने का आधार नहीं बन सकती। इसी मामले में राज्य सरकार को यूजीसी की गाइडलाइन की जांच कर 120 दिन के भीतर निर्णय लेने के निर्देश भी दिए गए हैं।
एक अन्य आदेश में हाई कोर्ट ने कहा कि किसी भी ठेके को समाप्त करने से पहले संबंधित पक्ष को स्पष्ट कारण बताओ नोटिस देना जरूरी है। अदालत ने माना कि ऐसा नहीं करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। इसी आधार पर छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन का टर्मिनेशन आदेश रद्द कर दिया गया, जिससे करीब 2.79 करोड़ रुपये के भुगतान का रास्ता साफ हो गया।