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High Court deems suspension following minor penalty unjustified; employee to receive full salary.
बिलासपुर। विभागीय जांच में लघु दंड पाए शासकीय कर्मचारी को उसी प्रकरण के आधार पर निलंबित रखने के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब किसी कर्मचारी को विभागीय कार्रवाई के बाद केवल लघु दंड दिया जा चुका हो, तब उसी आधार पर निलंबन की अवधि को उचित नहीं ठहराया जा सकता। न्यायालय ने निलंबन अवधि के वेतन को लेकर भी कर्मचारी के पक्ष में आदेश जारी किया है।
मामला रायपुर रेल पुलिस कार्यालय में पदस्थ सहायक उप निरीक्षक नाजमा खान से जुड़ा है। विभागीय जांच में उनके खिलाफ कार्रवाई के बाद उन्हें निलंबित किया गया था। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें केवल 50 प्रतिशत वेतन देने का आदेश जारी किया गया।याचिका में कर्मचारी की ओर से तर्क दिया गया कि विभागीय जांच पूरी होने के बाद लघु दंड दिया जा चुका है। इसके बावजूद निलंबन अवधि को जारी रखना और उस अवधि के वेतन में कटौती करना उचित नहीं है।
हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान संबंधित विभाग के आदेशों और पूरी प्रक्रिया का परीक्षण किया। न्यायालय ने माना कि विभागीय कार्रवाई में लघु दंड मिलने के बाद कर्मचारी को लंबे समय तक निलंबित रखना उचित आधार पर कायम नहीं रह सकता।कोर्ट ने निलंबन से संबंधित आदेश को निरस्त करते हुए कर्मचारी को राहत दी। साथ ही निलंबन अवधि के वेतन से जुड़े विभागीय आदेश को भी कर्मचारी के हित में संशोधित करने का निर्देश दिया गया।
फैसले से यह संकेत मिला है कि शासकीय कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करते समय विभाग को दंड की प्रकृति और निलंबन के औचित्य के बीच स्पष्ट संबंध रखना होगा। मामूली अनुशासनात्मक गलती के लिए लघु दंड दिए जाने के बाद उसी आधार पर निलंबन जारी रखना न्यायिक कसौटी पर उचित नहीं माना जा सकता।हाईकोर्ट के इस फैसले को उन कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिन पर विभागीय जांच के बाद लघु दंड लगाया गया है, लेकिन उन्हें निलंबन अवधि का पूरा लाभ नहीं दिया गया है।