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High Court strict on plastic pollution, action not only against vendors, government should reach the source
रायपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने प्रदेश में सिंगल यूज प्लास्टिक के बढ़ते उपयोग और उससे फैल रहे पर्यावरण प्रदूषण पर कड़ी नाराजगी जताई है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा कि केवल छोटे दुकानदारों और वेंडर्स पर जुर्माना लगाना समस्या का समाधान नहीं है। अदालत ने इसे “आईवॉश” बताते हुए कहा कि प्रशासन को प्रतिबंधित प्लास्टिक के वास्तविक स्रोत तक पहुंचकर उत्पादन और सप्लाई करने वाली इकाइयों पर कार्रवाई करनी चाहिए।
जनहित याचिका पर हुई सुनवाई
राज्य में पॉलीथिन की बिक्री और उससे हो रहे प्रदूषण को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने यह टिप्पणी की। रायपुर निवासी नितिन सिंघवी ने याचिका में बताया कि राज्य सरकार ने प्लास्टिक कैरी बैग, डिस्पोजेबल कप, प्लेट, गिलास, चम्मच, स्ट्रॉ, थर्मोकॉल सजावटी सामग्री, 200 मिलीलीटर से कम की पीईटी बोतलों और फ्लेक्स-बैनर पर प्रतिबंध लगाया है, लेकिन इसके बावजूद बाजार में इनका उपयोग जारी है।
हाई कोर्ट के प्रमुख निर्देश
अदालत ने राज्य सरकार को पूरे प्रदेश में विशेष “प्लास्टिक हटाओ अभियान” चलाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कहा कि प्रशासन यह पता लगाए कि प्रतिबंधित प्लास्टिक का निर्माण और सप्लाई कहां से हो रही है और मुख्य दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि सोशल मीडिया, स्कूलों और विज्ञापनों के माध्यम से लोगों को कपड़े और जूट के बैग इस्तेमाल करने के लिए जागरूक किया जाए।
‘सिर्फ सरकारी कार्रवाई से नहीं खत्म होगा प्रदूषण’
हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान नागरिकों की जिम्मेदारी पर भी जोर दिया। अदालत ने कहा कि केवल सरकारी कार्रवाई से प्रदूषण खत्म नहीं होगा। जब तक लोग खुद प्रतिबंधित प्लास्टिक का उपयोग बंद नहीं करेंगे, तब तक इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।
कोर्ट ने कहा कि समाज में “सिविक सेंस” की कमी चिंता का विषय है और पर्यावरण संरक्षण के लिए सरकार के साथ-साथ आम नागरिकों को भी जिम्मेदारी निभानी होगी।