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High Court takes a tough stance in the Bareilly violence case... The case takes a new turn as Maulana Tauqir Raza is denied bail.
प्रयागराज। बरेली में सितंबर 2025 में हुई हिंसा के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल के अध्यक्ष मौलाना तौकीर रजा खान को राहत देने से इनकार कर दिया है। न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव की एकल पीठ ने उनकी जमानत याचिका खारिज करते हुए कानून-व्यवस्था और भड़काऊ नारों को लेकर कड़ी टिप्पणी की।अदालत ने माना कि इस तरह के नारे कानून के शासन के लिए गंभीर चुनौती बन सकते हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने में जुटी पुलिस पर हमला किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कथित तौर पर लगाए गए 'गुस्ताख-ए-नबी की एक ही सजा, सिर तन से जुदा' जैसे नारे को गंभीरता से लिया। अभियोजन के तर्क से सहमति जताते हुए कोर्ट ने कहा कि ऐसे नारे देश की संप्रभुता और अखंडता के लिए चुनौती पैदा करने वाले तथा सशस्त्र विद्रोह के लिए उकसावे के रूप में देखे जा सकते हैं।अदालत ने धार्मिक आस्था से जुड़े सामान्य नारों और हिंसा या अलगाव की ओर उकसाने वाले नारों के बीच अंतर भी स्पष्ट किया।
मौलाना तौकीर रजा के खिलाफ बरेली कोतवाली में भारतीय न्याय संहिता, आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज है।वह 27 सितंबर 2025 से जेल में हैं। इससे पहले ट्रायल कोर्ट ने भी 10 नवंबर 2025 को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट का रुख किया था।
मौलाना की ओर से अदालत में दलील दी गई कि उन्हें राजनीतिक रंजिश के कारण मामले में फंसाया गया है। बचाव पक्ष के अनुसार, 19 सितंबर को एक बैठक में विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया गया था, लेकिन प्रशासन से अनुमति नहीं मिलने के बाद कार्यक्रम रद कर दिया गया।बचाव पक्ष ने यह भी दावा किया कि 26 सितंबर को हिंसा के दौरान मौलाना घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे। उनके अनुसार, उस दिन सुबह करीब 10 बजे से उन्हें घर में नजरबंद रखा गया था। उन्होंने न तो हिंसा का आह्वान किया और न ही कोई भाषण दिया।
राज्य सरकार की ओर से अदालत में मौलाना तौकीर रजा को हिंसा का मास्टरमाइंड बताया गया। अभियोजन ने उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों और मामले की परिस्थितियों का हवाला देते हुए जमानत का विरोध किया।हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत की टिप्पणी से स्पष्ट है कि मामले में कथित भड़काऊ भाषण, नारे, हिंसा और पुलिस पर हमले जैसे पहलुओं को गंभीरता से देखा जा रहा है।
हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद मौलाना तौकीर रजा को फिलहाल इस मामले में राहत नहीं मिली है। अब आगे की न्यायिक प्रक्रिया और ट्रायल में सामने आने वाले साक्ष्यों पर निगाह रहेगी। अदालत का अंतिम निष्कर्ष पूरे मुकदमे की सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तय होगा।