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INTUC stages a massive protest at Bhilai Steel Plant over the workers' 8-point demands.
भिलाई। भिलाई इस्पात संयंत्र में कार्यरत कर्मचारियों और ठेका श्रमिकों की विभिन्न मांगों को लेकर मान्यता प्राप्त स्टील एम्प्लॉइज यूनियन इंटक ने गुरुवार को जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। यूनियन के अध्यक्ष संजय कुमार साहू के नेतृत्व में मुर्गा चौक पर बड़ी संख्या में यूनियन सदस्य और ठेका श्रमिक जुटे। इस दौरान श्रमिकों ने अपनी मांगों को लेकर जमकर नारेबाजी की और बीएसपी प्रबंधन के खिलाफ आवाज बुलंद की।
प्रदर्शन के बाद यूनियन की ओर से भिलाई इस्पात संयंत्र के आईआर महाप्रबंधक राजीव कुमार को 8 सूत्रीय मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा गया। यूनियन ने स्पष्ट किया कि यदि प्रबंधन ने मांगों पर जल्द सकारात्मक पहल नहीं की, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
39 महीने के एरियर्स का भुगतान करने की मांग
इस्पात ठेका श्रमिक यूनियन के अध्यक्ष एवं स्टील एम्प्लॉइज यूनियन इंटक भिलाई के महासचिव संजय कुमार साहू ने कहा कि आज का धरना-प्रदर्शन भिलाई इस्पात संयंत्र में काम करने वाले कर्मचारियों और श्रमिकों की मांगों को लेकर किया गया है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों का 39 महीने का एरियर्स लंबे समय से लंबित है। अब इसे लेकर श्रमिकों में नाराजगी है और प्रबंधन से लंबित एरियर्स का जल्द भुगतान करने की मांग की जा रही है।
संजय साहू ने कहा कि वेज रिवीजन से जुड़ा मुद्दा भी महत्वपूर्ण है। 1 जनवरी 2027 से नया वेज रिवीजन लागू होना है, इसलिए उससे पहले लंबित मामलों का समाधान किया जाना जरूरी है।
मंथली इंसेंटिव स्कीम में बदलाव और ₹10 हजार देने की मांग
यूनियन ने मंथली इंसेंटिव स्कीम को रिवाइज करने की भी मांग उठाई है। संजय साहू के मुताबिक कर्मचारियों को वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए ₹10,000 प्रतिमाह इंसेंटिव दिए जाने की मांग की जा रही है। यूनियन का कहना है कि श्रमिकों के योगदान और संयंत्र में उनके काम को देखते हुए इंसेंटिव स्कीम में आवश्यक सुधार किया जाना चाहिए।
650 वर्गफीट आवास को लाइसेंस में देने की मांग
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों के आवास से जुड़ा मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। यूनियन ने 650 वर्गफीट के आवास को लाइसेंस में दिए जाने की मांग की है। यूनियन का कहना है कि इस संबंध में भी प्रबंधन को सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए और श्रमिकों के हित में प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी चाहिए।
ठेका श्रमिकों के न्यूनतम वेतन का मुद्दा
संजय साहू ने कहा कि भिलाई इस्पात संयंत्र में बड़ी संख्या में ठेका श्रमिक काम करते हैं और संयंत्र के कामकाज में उनका महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने दावा किया कि नवंबर 2025 से लागू केंद्रीय न्यूनतम वेतन का लाभ ठेका श्रमिकों को नहीं मिल रहा है।
उन्होंने मांग की कि केंद्रीय न्यूनतम वेतन को बीएसपी प्रबंधन जल्द से जल्द लागू करे और ठेका श्रमिकों को उनका वैधानिक हक मिले।
ठेका श्रमिकों के लिए ₹26 हजार न्यूनतम वेतन की मांग
यूनियन ने ठेका श्रमिकों के लिए कम से कम ₹26,000 प्रतिमाह न्यूनतम वेतन देने की भी मांग की है। संजय साहू ने कहा कि ठेका श्रमिक संयंत्र में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं, इसलिए उनके वेतन और सुविधाओं को लेकर प्रबंधन को गंभीरता से निर्णय लेना चाहिए।
छंटनी रोकने की मांग, आंदोलन तेज करने की चेतावनी
यूनियन ने ठेका श्रमिकों की छंटनी का मुद्दा भी उठाया। संजय साहू ने आरोप लगाया कि मेडिकल और छंटनी के नाम पर काम कर रहे ठेका श्रमिकों को हटाया जा रहा है। उन्होंने इस प्रक्रिया को तत्काल रोकने की मांग की।
उन्होंने कहा कि श्रमिकों के हितों से जुड़े इन मुद्दों पर यदि बीएसपी प्रबंधन ने ध्यान नहीं दिया तो आने वाले समय में आंदोलन को और बड़ा किया जाएगा।
संजय साहू ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि प्रबंधन ने मांगों पर जल्द पहल नहीं की तो यूनियन बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होगी। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर आज के प्रदर्शन से भी बड़ा आंदोलन किया जाएगा और श्रमिकों की आवाज को मजबूती से उठाया जाएगा।
कुल मिलाकर, भिलाई इस्पात संयंत्र में वेतन, एरियर्स, इंसेंटिव, आवास, न्यूनतम वेतन और ठेका श्रमिकों की छंटनी जैसे मुद्दों को लेकर INTUC के प्रदर्शन ने एक बार फिर श्रमिक हितों से जुड़े सवालों को सामने ला दिया है। अब देखना होगा कि यूनियन के ज्ञापन पर BSP प्रबंधन की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है और लंबित मांगों को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है।