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If you ask, I will tell you… Trump's mother fell asleep while I was preparing the raita - Chaitanya Bhatt
किसी से भी पूछ लिया जाय कि सारी दुनिया पर कौन सा एक शख्स पनौती बना हुआ है तो निर्विवाद जवाब होगा, अमेरिकी राष्ट्रपति "डोनाल्ड ट्रम्प"। खुद को पूरी दुनिया का थानेदार समझने वाले इस आदमी को पूरी दुनिया को हर रोज अलसेट का नया डोज दिए बिना नींद ही नहीं आती। दूसरे नेताओं की बेइज्जती करना, कटोरा फैलाकर शांति का नोबेल पुरस्कार मांगना, खुद को मसीहा बताना और दुनिया भर में रायता फैलाना इनकी अन्य महत्वपूर्ण हॉबी हैं। ऊल-जुलूल बातें कर कर के अपने खुद के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म "ट्रुथ सोशल" को "लाई अनसोशल" बना कर रख दिया है। दुनिया भर में टैरिफ का आतंक फैलाने के खेल से शांति नहीं मिली तो ईरान से बेफिजूल युद्ध छेड़ दिया। कभी कहते हैं कि ईरान की न्यूक्लियर ताकत तबाह कर दी तो कभी कहते हैं ईरान की न्यूक्लियर ताकत दुनिया के लिए खतरा है। और दुनिया है कि हैरान परेशान है कि आखिर ये आदमी ऐसा क्यों है ?
दरअसल जब अपन ने इनके बारे में खोज बीन की तो ये तथ्य सामने आया। कौरव और पांडवों के बीच चल रहे महाभारत में एक दृष्टांत है जब अर्जुन के बेटे अभिमन्यु की मौत चक्रव्यूह में फंस कर हो गई थी तब ये राज सामने आया था कि महायोद्धा अर्जुन अपनी पत्नी सुभद्रा को चक्रव्यूह भेदन की कथा सुना रहे थे। उस वक्त अभिमन्यु मां सुभद्रा के गर्भ में थे। चक्रव्यूह प्रवेश तक की कथा सुनते सुनते अचानक सुभद्रा की नींद लग गई और अभिमन्यु चक्रव्यूह में घुसने की कला तो सीख गए लेकिन सुभद्रा के नींद लग जाने की वजह से चक्रव्यूह से बाहर निकलने की कला सीखने से वंचित रह गए।
इसी कथा की परिकल्पना ट्रंप के संदर्भ में कीजिए। डोनाल्ड ट्रंप जब अपनी मां "मैरी ऐन ट्रम्प" के गर्भ में थे जब उनके पिता "फ्रेडरिक ट्रम्प" अपनी पत्नी को "रायता फैलाने और रायता समेटने" की कथा सुना रहे थे। रायता फैलाने तक की कथा सुनते सुनते उनकी पत्नी को नींद आ गई इसलिए ट्रंप बाबू गर्भ में रायता फैलाने की प्रक्रिया तो सीख गए मगर समेटने की विधि अनजानी रह गई। ईरान युद्ध के चक्रव्यूह में यही कमी गले पड़ गई है सो न निगलते बन रहा है न उगलते। और करे कोई भरे कोई की तर्ज़ पर उनकी नौटंकी का खामियाजा सारी दुनिया भुगत रही है।
यू टर्न तो आम बात
इंदौर के खराब ट्रैफिक को लेकर उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने एक टिप्पणी की कि आजकल "यू टर्न" लेने में डर लगता है कि कौन कब आकर टक्कर मार दे, हाई कोर्ट की टिप्पणी ट्रैफिक को लेकर रही होगी लेकिन आजकल राजनीति में यू टर्न लेना तो आम बात हो गई अब देखो ना "राघव चड्ढा" जो बीजेपी को पानी पी पीकर कोसते थे अरविंद केजरीवाल को अपना गुरु और पिता समान मानते थे उन्होंने ऐसा यू टर्न लिया की अरविंद केजरीवाल की भी आंखें फटी की फटी रह गई खुद तो यू टर्न लिया ही अपने साथ छह लोगों को और यू टर्न दिलवा दिया जिसमें एक क्रिकेट का भी खिलाड़ी है , वैसे उनको यू टर्न लेने का पुराना अनुभव है क्योंकि जब विकेट गिर जाता था तो उनको यू टर्न लेकर वापस गैलरी में जाना पड़ता था।
जनता बेचारी करें तो करें क्या,? कितनी आशाओं के साथ अपना जनप्रतिनिधि चुनती है आम आदमी पार्टी के विधायकों ने भी कितनी आशाओं के साथ इन सबको राज्यसभा में भेजा था कि राज्यसभा में जाकर पार्टी के पक्ष में काम करेंगे और जनता के मुद्दों पर चर्चा करेंगे लेकिन उन्हें क्या पता था कि वे जिनको राज्यसभा में भेज रहे हैं वे कब अपनी कुर्सी से यू टर्न लेकर दूसरे दल की कुर्सी पर जा बैठेंगे। हाई कोर्ट की टिप्पणी भले ही ट्रैफिक को लेकर हो लेकिन उनकी यह टिप्पणी राजनीति पर ज्यादा माफिक बैठ रही है अपने को तो आज तक समझ में नहीं आया कि कल तक जिस पार्टी की बखिया उधेड़ते थे आज टीवी चैनल में बैठकर उसकी तारीफों के पुल अचानक कैसे बांधने लगते हैं कुछ तो अंतरात्मा भी बोलती होगी कि ये क्या कर रहे हो? लेकिन आजकल अंतरात्मा की आवाज सुनता कौन है? मित्तल जी पर ईडी का छापा पड़ा तो वे समझ गए कि भैया अगर इससे बचना है तो कमल का साथ पकड़ लो और पकड़ भी लिया। सड़क पर यू टर्न लेने पर ज्यादा से ज्यादा भिड़ंत हो जाएगी लेकिन राजनीति के यू टर्न ने तो पूरी राजनीति के मायने ही बदल दिए ।
गोपाल जी का दर्द
कई बार के विधायक "गोपाल भार्गव" का दर्द बीच-बीच में इतना बढ़ जाता है कि वे कराहने लगते हैं कब से राह देख रहे हैं कि मंत्रिमंडल का विस्तार होगा और उनको फिर मंत्रिमंडल में शामिल कर लिया जाएगा लेकिन इंतजार, और इंतजार इसके अलावा उनके हिस्से में और कुछ नहीं आ रहा कभी-कभी बीच में पार्टी की लाइन से हटकर भी बयान दे देते हैं सोचते हैं शायद पार्टी उनके दर्द और आक्रोश को देखते हुए उन्हें कुछ ना कुछ दे देगी लेकिन पार्टी के पास इतने लोग हो गए हैं कि वो भी बेचारी किस-किस को एडजस्ट करे।
हाल ही में गोपाल भार्गव जी ने एक बयान दे दिया कि जाति के सामने पार्टी कोई महत्व नहीं रखती इसका मतलब साफ है उन्होंने पार्टी के आला कमान को भी सीधा-सीधा संदेश दे दिया कि मेरे लिए मेरी जाति पहले है और पार्टी बाद में, जबकि आजकल तो पार्टी सबसे पहले होती है और उसके बाद दूसरी चीज, लेकिन गोपाल जी आखिर कब तक इंतजार करें इंतजार की भी कोई सीमा होती है और वो सीमा खत्म हो गई है बीच-बीच में निगम मंडलों में नियुक्तियां की चर्चा चलती है वे सोचते हैं चलो मंत्री ना सही निगम मंडल में ही कहीं कुछ जुगाड़ बन जाए लेकिन मंडल निगमों और विकास प्राधिकरणों की नियुक्ति भी "बीरबल की खिचड़ी" हो गई है पता नहीं कब इन में नियुक्ति होगी और भार्गव जी की किस्मत खुल जाएगी लेकिन ये कब खुलेगी ये कोई नहीं कह सकता।
सुपर हिट ऑफ द वीक
"योग करने के बाद आपके पति की शराब पीने की आदतों में कुछ बदलाव आया क्या?" योग गुरु ने श्रीमान जी की श्रीमती जी से पूछा
"भारी बदलाव आया है अब वे सर के बल खड़े होकर भी एक बोतल डकार जाते हैं" श्रीमती जी का उत्तर था