

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

Only family members present at the time of death are eligible for compassionate appointment: High Court
लखनऊ। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के समय जो सदस्य उसके परिवार का हिस्सा होते हैं, वही इस सुविधा का लाभ पाने के हकदार होंगे। बाद में विवाह या अन्य परिस्थितियों से परिवार में जुड़े व्यक्तियों को इसका अधिकार नहीं मिलेगा।
मामले की पृष्ठभूमि
यह फैसला न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति ए.के. चौधरी की खंडपीठ ने दीपिका तिवारी की विशेष अपील को खारिज करते हुए दिया। मामला संगीता बाजपेई से जुड़ा था, जो नारी शिक्षा निकेतन इंटर कॉलेज में सहायक अध्यापिका थीं। 23 अप्रैल 2021 को सेवाकाल के दौरान उनका निधन हो गया।
परिवार की स्थिति और आवेदन
संगीता बाजपेई के परिवार में उनके पति और बेरोजगार पुत्र निखिल बाजपेई थे। मां की मृत्यु के बाद निखिल ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया, लेकिन अप्रैल 2023 में यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया गया कि उनके पिता पेंशनभोगी हैं।
विवाह और नई दावेदारी
इसी दौरान 15 फरवरी 2023 को निखिल का विवाह दीपिका तिवारी से हुआ। विवाह के कुछ ही महीनों बाद, 13 मई 2023 को निखिल की भी मृत्यु हो गई। इसके बाद दीपिका ने स्वयं को “विधवा बहू” बताते हुए अनुकंपा नियुक्ति की मांग की।
अदालत का स्पष्ट रुख
हाई कोर्ट ने दीपिका का दावा खारिज करते हुए कहा कि “विधवा बहू” का अधिकार तभी बनता है, जब वह संबंधित कर्मचारी की मृत्यु के समय परिवार का हिस्सा हो। चूंकि दीपिका का विवाह कर्मचारी की मृत्यु के बाद हुआ था, इसलिए वह इस आधार पर अनुकंपा नियुक्ति की पात्र नहीं हैं।
फैसले का महत्व
यह निर्णय अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े मामलों में एक स्पष्ट कानूनी सिद्धांत स्थापित करता है। अदालत ने दोहराया कि यह सुविधा केवल उन आश्रितों के लिए है जो कर्मचारी की मृत्यु के समय वास्तविक रूप से परिवार का हिस्सा हों और आर्थिक संकट का सामना कर रहे हों।