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Illegal building collapses again in Delhi... A scene of death in a PG packed with students... 5 lives lost, including Yuvraj from Durg.
नई दिल्ली। सत्य निकेतन इलाके में एक पांच मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे के समय इमारत में बॉयज पीजी संचालित हो रहा था, जहां दिल्ली विश्वविद्यालय के कई छात्र रह रहे थे। हादसे में अब तक पांच लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि कई लोग घायल हुए हैं। मलबे में कुछ और लोगों के दबे होने की आशंका के चलते देर तक राहत और बचाव अभियान चलता रहा।इस दर्दनाक हादसे में छत्तीसगढ़ के दुर्ग निवासी युवराज सोनी की भी मौत हो गई। युवराज दिल्ली के मोतीलाल नेहरू कॉलेज में बीकॉम द्वितीय वर्ष का छात्र था।
हादसे के बाद मलबे में फंसे एआरएसडी कॉलेज के छात्र आदित्य ने किसी तरह मोबाइल से वीडियो बनाया और अपने कॉलेज के छात्र समूह में भेजा। वीडियो में वह बेहद संकरी जगह में फंसा दिखाई दे रहा था। उसके माथे के पास चोट लगी थी और खून बह रहा था।बचाव दल के पहुंचने से पहले आदित्य ने वीडियो के जरिए अपनी स्थिति की जानकारी दी। मलबे में फंसे अन्य लोगों ने भी फोन के जरिए बाहर मौजूद लोगों से मदद की गुहार लगाई।
दुर्ग निवासी युवराज सोनी कुछ समय पहले छुट्टियां बिताने अपने घर गया था। उसके दोस्त आर्यन के अनुसार, कॉलेज की छुट्टियां खत्म होने के बाद युवराज करीब तीन दिन पहले ही दिल्ली वापस आया था।युवराज और आर्यन एक ही गांव के रहने वाले थे और बचपन से दोस्त थे। युवराज साउथ कैंपस के नजदीक पढ़ाई कर रहा था, जबकि आर्यन लाजपत नगर के एक पीजी में रहता है। दोनों छुट्टी के दिनों में अक्सर मुलाकात करते थे।
जानकारी के अनुसार, यह इमारत करीब 36 वर्ष पुरानी थी और इसका निर्माण 1990 में हुआ था। एमसीडी के रिकॉर्ड में इसे खतरनाक भवन घोषित नहीं किया गया था। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, बेसमेंट में चल रहे निर्माण या खुदाई के दौरान एक पिलर खिसकने के बाद पूरी इमारत ढह गई।स्थानीय लोगों के अनुसार, बेसमेंट में काम चल रहा था और वहां पानी भी जमा था। इससे भवन की नींव कमजोर होने की आशंका जताई गई है।
एमसीडी अधिकारियों के अनुसार, करीब 55 वर्ग गज के प्लॉट पर बनी इस इमारत के लिए केवल भूतल और पहली मंजिल के निर्माण की अनुमति थी। इसके बावजूद भवन में कुल पांच मंजिलें बनी हुई थीं। यानी तीन मंजिलें कथित तौर पर अवैध थीं।कांग्रेस ने दावा किया है कि इमारत को करीब एक महीने पहले ही खतरनाक घोषित कर सील किया गया था। हालांकि एमसीडी अधिकारियों ने इस दावे से अलग जानकारी देते हुए कहा कि उनके रिकॉर्ड में सीलिंग का कोई उल्लेख नहीं है और निर्माण को लेकर भी शिकायत दर्ज होने की जानकारी नहीं है।
सत्य निकेतन इलाके में बड़ी संख्या में पीजी, हॉस्टल और खाने-पीने की दुकानें हैं। हादसे के बाद संकरी गलियों के कारण राहत और बचाव उपकरण घटनास्थल तक पहुंचाने में भी परेशानी हुई।बताया गया कि ढही इमारत में करीब 15 कमरे थे और कई कमरों में दो से तीन छात्र रहते थे। छुट्टी का दिन होने के कारण अधिकांश छात्र अपने कमरों में मौजूद थे। इमारत गिरते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोगों ने भी मलबा हटाने में बचाव दल की मदद की।स्थानीय निवासियों का आरोप है कि क्षेत्र में कई पुराने मकानों को पांच से छह मंजिल तक बढ़ाकर पीजी में बदल दिया गया है। उनका कहना है कि कई भवन मालिक खुद यहां नहीं रहते और किराया ऑनलाइन वसूलते हैं, जबकि इमारतों के रखरखाव पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता।
हादसे के बाद साउथ कैंपस थाना पुलिस ने भवन स्वामी हरिओम बंसल के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। पुलिस आरोपी की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।एमसीडी ने हादसे से सटी एक गर्ल्स पीजी बिल्डिंग को भी सील कर दिया है। जर्जर भवन को गिराने की कार्रवाई की तैयारी की जा रही है और वहां रहने वाले किराएदारों को सामुदायिक भवन में स्थानांतरित किया गया है।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता घटनास्थल पर पहुंचीं और अधिकारियों से राहत अभियान की जानकारी ली। उन्होंने मामले की जांच के निर्देश दिए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी मुख्यमंत्री, दिल्ली पुलिस आयुक्त और एनडीआरएफ के महानिदेशक से बातचीत कर घटनास्थल की स्थिति की जानकारी ली।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे में हुई मौतों पर दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। घटना ने दिल्ली में पुराने और अनधिकृत भवनों की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।