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The balance of power could shift the moment it enters the sea... the world has its eyes on this Russian warship.
नई दिल्ली। रूस का परमाणु ऊर्जा से संचालित युद्धपोत एडमिरल नखिमोव एक बार फिर समुद्र में अपनी ताकत दिखाने के लिए तैयार है। सोवियत दौर में नौसेना में शामिल किए गए इस विशाल बैटलक्रूजर को वर्षों तक चले आधुनिकीकरण के बाद नई क्षमताओं से लैस किया गया है। हाल ही में इसके समुद्री परीक्षण पूरे हुए हैं और रिपोर्टों के अनुसार 2026 के अंत तक इसे रूसी नौसेना में शामिल किया जा सकता है।1988 में सेवा में आए इस युद्धपोत के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया 2013 के बाद शुरू हुई थी। लंबे समय तक चले इस अपग्रेड में इसके हथियारों, रडार, एयर डिफेंस और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को आधुनिक बनाया गया है।
एडमिरल नखिमोव की लंबाई करीब 251 मीटर और चौड़ाई 28.5 मीटर बताई जाती है। इसका विस्थापन लगभग 28 हजार टन है और यह करीब 59 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम गति हासिल कर सकता है।इसमें दो परमाणु रिएक्टर लगाए गए हैं। परमाणु ऊर्जा आधारित प्रणोदन के कारण इसे लंबे समय तक समुद्र में अभियान चलाने की क्षमता मिलती है। युद्धपोत पर 700 से अधिक नौसैनिक और अधिकारी तैनात किए जा सकते हैं। इसमें हेलिकॉप्टर संचालन के लिए लैंडिंग पैड भी मौजूद है।
नखिमोव की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में इसकी मिसाइल क्षमता शामिल है। इसे जिरकॉन हाइपरसोनिक एंटी-शिप क्रूज मिसाइल से लैस किया गया है। जिरकॉन की गति मैक 8 से 9 तक बताई जाती है और इसकी मारक क्षमता करीब 1000 किलोमीटर तक बताई जाती है।इसके अलावा युद्धपोत पर कैलिबर और ओनिक्स जैसी मिसाइल प्रणालियां भी शामिल हैं। कैलिबर परिवार की मिसाइलों का इस्तेमाल लंबी दूरी के सटीक हमलों के लिए किया जाता है, जबकि ओनिक्स मुख्य रूप से समुद्री लक्ष्यों के खिलाफ इस्तेमाल होने वाली सुपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल है।
युद्धपोत की सुरक्षा के लिए बहुस्तरीय एयर डिफेंस सिस्टम लगाया गया है। एस-400 और रेडुत जैसी लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणालियों के साथ पैनत्सिर-एम जैसे क्लोज-इन डिफेंस सिस्टम इसे ड्रोन, लड़ाकू विमानों और क्रूज मिसाइलों जैसे खतरों से सुरक्षा देने के लिए तैयार किए गए हैं।इसके अलावा फोर्ट-एम एयर डिफेंस सिस्टम, उदाव रॉकेट सिस्टम और पकेट-एनके जैसी प्रणालियां भी इसकी सुरक्षा और पनडुब्बी रोधी क्षमता को मजबूत करती हैं।
नखिमोव के आधुनिकीकरण का एक बड़ा हिस्सा इसके वर्टिकल लॉन्च सिस्टम हैं। इसमें करीब 80 स्ट्राइक मिसाइल सेल और 96 एयर डिफेंस मिसाइल सेल होने की जानकारी दी गई है। इस वजह से अकेला युद्धपोत लंबी दूरी के हमले और हवाई सुरक्षा दोनों भूमिकाएं एक साथ निभा सकता है।इसी क्षमता के कारण इसकी तुलना कई आधुनिक फ्रिगेटों की संयुक्त मारक क्षमता से की जाती है। हालांकि किसी युद्धपोत की वास्तविक प्रभावशीलता केवल मिसाइलों की संख्या पर निर्भर नहीं करती। सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, चालक दल, नेटवर्क आधारित युद्ध क्षमता और उसके साथ चलने वाले अन्य नौसैनिक प्लेटफॉर्म भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
नखिमोव के आधुनिक रूप से पहले रूसी नौसेना का प्योत्र वेलिकी, अमेरिकी टिकोनडेरोगा श्रेणी और चीन का टाइप-055 जैसे युद्धपोत अपनी-अपनी क्षमताओं के कारण चर्चा में रहे हैं। नखिमोव के नए संस्करण का उद्देश्य रूस को एक ऐसा भारी सतही युद्धपोत उपलब्ध कराना है, जो लंबी दूरी के हमले, एयर डिफेंस और एंटी-सबमरीन ऑपरेशन जैसी कई भूमिकाएं एक साथ निभा सके।समुद्र में इसकी वास्तविक ताकत हालांकि इसके परिचालन में आने और रूसी नौसेना के अन्य जहाजों तथा विमानों के साथ संयुक्त अभियान के दौरान ही पूरी तरह सामने आएगी।