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MP News: In one instance, an MLA touched Scindia's son's feet, in another, the CM forgot the minister's department; a Congress leader lashed out at a journalist, saying,
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयान, व्यवहार और मंचीय घटनाओं को लेकर चर्चाओं का दौर तेज है। मुख्यमंत्री की जुबान फिसलने से लेकर विधायक द्वारा युवा नेता के पैर छूने, पत्रकार पर भड़कते कांग्रेस नेता और मंच से अपनी ही यात्रा का नाम भूल जाने तक दिनभर कई राजनीतिक घटनाएं सुर्खियों में रहीं।
सीएम से मंत्री का विभाग भूलने की “स्लिप ऑफ टंग”
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार को भोपाल में विकसित भारत जी-राम-जी योजना को लेकर मीडिया को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उनके साथ पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल भी मौजूद थे। पत्रकार के सवाल का जवाब देते हुए सीएम ने प्रहलाद पटेल को पहले प्रभारी मंत्री और फिर कृषि मंत्री कह दिया, जबकि उनके पास पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग है।

हालांकि इसे “स्लिप ऑफ टंग” माना जा रहा है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मंत्री प्रहलाद पटेल के साथ ऐसी घटनाएं बार-बार क्यों हो जाती हैं। कुछ दिन पहले खजुराहो के एक कार्यक्रम में भी मुख्यमंत्री मंच से उनका पूरा नाम भूल गए थे और उन्हें प्रहलाद सिंह लोधी कहकर संबोधित कर दिया था। तब मंत्री ने हैरानी जताते हुए मुस्कुराकर मामला संभाल लिया था और सीएम ने माफी भी मांगी थी।
विधायक ने सिंधिया के बेटे के पैर छुए, वीडियो वायरल
शिवपुरी से भाजपा विधायक देवेंद्र जैन अपने जन्मदिन पर एक अलग वजह से चर्चा में आ गए। 73 वर्षीय विधायक ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के 30 वर्षीय बेटे महान आर्यमान सिंधिया के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। यह घटना 5 जनवरी को एक खेल आयोजन के मंच पर हुई, जहां विधायक ने केक काटा और महान आर्यमान ने उन्हें केक खिलाया।
इस वीडियो के सामने आते ही सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। लोग सवाल उठा रहे हैं कि तीन दशक से राजनीति में सक्रिय वरिष्ठ विधायक का इतने कम उम्र के नेता के पैर छूना क्या राजनीतिक संस्कार है या सत्ता-समीकरण का असर। समर्थकों का कहना है कि यह सम्मान का भाव है, जबकि आलोचक इसे चाटुकारिता से जोड़कर देख रहे हैं।

पत्रकार के सवाल पर कांग्रेस नेता भड़के, दी खुली चुनौती
इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों को लेकर कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक और विवाद खड़ा हो गया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सवालों का जवाब दे रहे थे, तभी एक पत्रकार ने पूछा कि टेंडर रुके थे तो कांग्रेस ने विरोध क्यों नहीं किया और मेयर से मिलीभगत के आरोप भी लगाए।
सवाल उमंग सिंघार से था, लेकिन इंदौर नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे बीच में बोल पड़े। उन्होंने पत्रकार को खुली चुनौती देते हुए कहा कि अगर उनके और मेयर के बीच संबंध साबित हो जाएं तो वे राजनीति छोड़ देंगे, वरना पत्रकार को पत्रकारिता छोड़नी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि “मैं चिंटू चौकसे हूं, मेरे बारे में सोच-समझकर बोलना।”
हालांकि उमंग सिंघार और सज्जन वर्मा ने माहौल शांत कराने की कोशिश की, लेकिन चौकसे लगातार तीखे बयान देते रहे। इस पूरे घटनाक्रम ने प्रेस की स्वतंत्रता और नेताओं की सहनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कांग्रेस नेत्री अपनी ही यात्रा का नाम भूल गईं
छिंदवाड़ा में कांग्रेस की इंदिरा ज्योति यात्रा की शुरुआत के दौरान जिला महिला कांग्रेस अध्यक्ष किरण चौधरी मंच से यात्रा का सही नाम तक नहीं बोल सकीं। उन्होंने इसे बार-बार “इंदिरा ज्योति अभियान” कहा, जबकि मंच पर बैठे नेताओं ने उन्हें दो बार सही नाम बताया।
इतना ही नहीं, मंच पर मौजूद नेताओं के नाम लेने के लिए भी उन्हें पीछे मुड़कर पूछना पड़ा। इस कार्यक्रम में एक और चर्चा का विषय रहा बैनर और पोस्टरों से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की तस्वीर का गायब होना। मंच और पोस्टरों पर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनके बेटे नकुलनाथ की तस्वीरें थीं, लेकिन पटवारी की फोटो नहीं दिखी। राजनीतिक गलियारों में इसे छिंदवाड़ा की “कमलनाथ-केंद्रित कांग्रेस राजनीति” से जोड़कर देखा जा रहा है।