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India's first case on Halala under the UCC, chargesheet filed against nine accused in Roorkee
रुड़की। रुड़की में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू होने के बाद हलाला से जुड़ा देश का पहला मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने तीन तलाक के एक मामले में पुनर्विवाह की शर्त के तौर पर हलाला का दबाव बनाने के आरोप में पति समेत नौ लोगों के खिलाफ अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया है। मामले में यूसीसी के दंडात्मक प्रावधानों का भी उल्लेख किया गया है।
दहेज उत्पीड़न और मारपीट के आरोप
पीड़िता की शादी दो वर्ष पहले मोहम्मद दानिश नामक युवक से हुई थी। महिला का आरोप है कि शादी के बाद से ही ससुराल पक्ष दहेज की मांग को लेकर उसे प्रताड़ित करता था। आरोप है कि उसे कमरे में बंद कर मारपीट की गई और बाद में पति ने तीन तलाक देकर घर से निकाल दिया।
करीब 15 दिन मायके में रहने के बाद जब महिला ने दोबारा साथ रखने की बात कही, तो उस पर हलाला करने का दबाव बनाया गया। महिला के अनुसार, पति ने कहा कि “जहां कहा जाए, वहां हलाला करना पड़ेगा।”
पहले आठ, अब नौ आरोपित
चार अप्रैल को पीड़िता ने पति, सास, ससुर, जेठ, देवर, ननद और ननदोई सहित आठ लोगों के खिलाफ Bugga Wala Police Station में दहेज उत्पीड़न और तीन तलाक का मुकदमा दर्ज कराया था। जांच के दौरान एक और व्यक्ति की भूमिका सामने आने पर आरोपितों की संख्या बढ़ाकर नौ कर दी गई।
पुलिस जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद यूसीसी एक्ट की धाराएं भी जोड़ी गईं। इसे गंभीर अपराध मानते हुए अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया गया है।
अल्पसंख्यक आयोग की उपाध्यक्ष करेंगी मुलाकात
उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग की उपाध्यक्ष फरजाना बेगम शुक्रवार को पीड़िता से मुलाकात कर उसकी शिकायत और स्थिति की जानकारी लेंगी।
विदेशी नागरिक से विवाह होने पर ऑफलाइन पंजीकरण की सुविधा
इस बीच, उत्तराखंड सरकार ने यूसीसी के तहत विवाह पंजीकरण प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव स्पष्ट किया है। अब यदि विवाह करने वाले दंपति में से एक पक्ष विदेशी नागरिक हो, तो विवाह पंजीकरण ऑफलाइन माध्यम से भी कराया जा सकेगा।
रजिस्ट्रार कार्यालय में होगा पंजीकरण
यूसीसी के तहत फिलहाल विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है। हालांकि शासन ने स्पष्ट किया है कि यदि पति या पत्नी में से कोई एक विदेशी नागरिक है, तो संबंधित दंपति सीधे रजिस्ट्रार कार्यालय में जाकर ऑफलाइन पंजीकरण करा सकते हैं। यूसीसी के अनुसार मार्च 2010 के बाद हुए सभी विवाहों का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है।