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Israel elections: Netanyahu and the opposition fall short of a majority; the key to power lies with Arab parties.
यरुशलम। इजराइल में चुनावी मतगणना के शुरुआती रुझानों ने सरकार गठन को लेकर तस्वीर उलझा दी है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के गठबंधन और गादी आइजनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी खेमे में से कोई भी बहुमत के आंकड़े तक पहुंचता नहीं दिख रहा। करीब 85 प्रतिशत मतपेटियों की गिनती के बाद नेतन्याहू खेमे को 53 और विपक्ष को 48 सीटें मिलने का अनुमान है।इजराइल की 120 सदस्यीय संसद नेसेट में बहुमत के लिए 61 सीटें जरूरी हैं। ऐसे में फिलिस्तीनी नेतृत्व वाले अरब राजनीतिक दलों की भूमिका अहम हो सकती है। रुझानों में इन दलों को कुल 19 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है। इनके समर्थन से सरकार गठन का समीकरण बदल सकता है।इजराइल में अब तक गठबंधन सरकारें बनती रही हैं। पिछले 77 वर्षों में किसी एक राजनीतिक दल को नेसेट में अपने दम पर बहुमत नहीं मिला है।
गणित: प्रचार में अरब दलों का समर्थन लेने से इनकार
चुनाव प्रचार के दौरान नेतन्याहू और विपक्ष, दोनों खेमों ने अरब दलों का समर्थन लेने की संभावना को खारिज किया था। हालांकि, मौजूदा रुझानों में बहुमत से दूर रहने के कारण सरकार गठन के लिए इन दलों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।अरब राजनीतिक दल मुख्य रूप से दो समूहों में बंटे हैं। पहला समूह जॉइंट लिस्ट है, जिसमें कई अरब राजनीतिक गुट शामिल हैं। इस समूह ने संकेत दिया है कि वह नेतन्याहू को सत्ता से बाहर रखने वाली सरकार को बाहर से समर्थन दे सकता है।दूसरा प्रमुख दल मंसूर अब्बास के नेतृत्व वाली रा'म पार्टी है। इस दल ने भी वैकल्पिक सरकार के गठन में सहयोग की संभावना जताई है। रा'म वर्ष 2021-22 में इजराइल की सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार का हिस्सा रह चुकी है।
अल्पमत सरकार बनाने की भी हो सकती है कोशिश
गादी आइजनकोट अरब सांसदों के समर्थन से अल्पमत सरकार बनाने का प्रयास कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में सरकार को बहुमत परीक्षण के दौरान अरब सांसदों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि, अंतिम समीकरण मतगणना पूरी होने और विभिन्न दलों के रुख स्पष्ट होने के बाद ही सामने आएगा।
आगे क्या होगा? राष्ट्रपति तय करेंगे सरकार गठन की प्रक्रिया
अंतिम चुनाव परिणाम आने के बाद इजराइल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग उस नेता को सरकार बनाने का अवसर देंगे, जिसके पास पर्याप्त संसदीय समर्थन जुटाने की संभावना होगी। सरकार बनाने के लिए संबंधित नेता को 28 दिन का समय मिलेगा।यदि इस अवधि में बहुमत का समर्थन हासिल नहीं हो पाता, तो अल्पमत सरकार, साझा सत्ता व्यवस्था या नए चुनाव जैसे विकल्प सामने आ सकते हैं। फिलहाल चुनावी नतीजों के बाद सरकार गठन का पूरा दारोमदार गठबंधन वार्ता और अरब दलों के रुख पर निर्भर करेगा।