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Know which leaders of Chhattisgarh had a special contribution in Bengal's victory.
रायपुर। पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी ने पहली बार ऐसा राजनीतिक प्रदर्शन किया है जिसने राज्य की राजनीति का समीकरण बदल दिया है। चुनाव परिणामों के बाद अब सबसे ज्यादा चर्चा उन नेताओं की हो रही है जिन्होंने ज़मीनी स्तर पर चुनाव अभियान को धार दी। इनमें छत्तीसगढ़ भाजपा के कई प्रमुख चेहरे शामिल हैं, जिनकी सक्रिय भूमिका के बाद अब उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी मिलने की संभावना जताई जा रही है।
सूत्रों के अनुसार भाजपा संगठन प्रभारी पवन साय, वरिष्ठ नेता सौरभ सिंह और प्रदेश के गृहमंत्री विजय शर्मा को राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की नई टीम में अहम दायित्व मिल सकते हैं।
बंगाल चुनाव में छत्तीसगढ़ के नेताओं की बड़ी भूमिका
भाजपा ने पश्चिम बंगाल चुनाव को बेहद गंभीरता से लिया था। पहली बार इतने बड़े स्तर पर कई राज्यों के मुख्यमंत्री, मंत्री और संगठन पदाधिकारियों की ड्यूटी एक ही राज्य में लगाई गई। छत्तीसगढ़ से भी सैकड़ों कार्यकर्ताओं को अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
पवन साय को 60 से अधिक विधानसभा सीटों की जवाबदेही दी गई थी। वहीं सौरभ सिंह को कोलकाता सहित 52 सीटों पर सक्रिय जिम्मेदारी मिली थी। विजय शर्मा को केंद्रीय नेतृत्व की विशेष रणनीतिक टीम में शामिल किया गया था।
पवन साय बोले- “यह जन-मन की जीत”
भाजपा के संगठन मंत्री पवन साय पिछले आठ महीनों से पश्चिम बंगाल में सक्रिय थे। चुनाव परिणामों के बाद उन्होंने कहा कि यह जीत कार्यकर्ताओं की मेहनत और जनता के विश्वास की जीत है।
उन्होंने कहा कि राज्य में तुष्टिकरण, भ्रष्टाचार और राजनीतिक हिंसा के खिलाफ जनता ने निर्णायक जनादेश दिया है। उनके मुताबिक बंगाल की जनता बदलाव चाहती थी और भाजपा ने उसी भावना को मजबूत किया।
सौरभ सिंह ने विकास मॉडल को बताया जीत का आधार
कोलकाता में डेरा जमाए सौरभ सिंह ने कहा कि भाजपा चुनाव खत्म होने के तुरंत बाद अगले चुनाव की तैयारी शुरू कर देती है। उन्होंने राष्ट्रीय नेतृत्व, खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के लगातार मार्गदर्शन को जीत का प्रमुख कारण बताया।
सौरभ सिंह के अनुसार भाजपा ने बंगाल में विकास को मुख्य मुद्दा बनाया और उन राज्यों के उदाहरण जनता के सामने रखे जहां भाजपा सरकारें विकास कार्यों के लिए जानी जाती हैं।
अनुराग सिंहदेव ने कहा- “तुष्टिकरण की राजनीति को जनता ने नकारा”
छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष अनुराग Singhदेव भी बंगाल में चुनावी मोर्चे पर सक्रिय थे। उन्होंने इसे राष्ट्रवाद और समान नागरिक विकास के पक्ष में आया जनादेश बताया।
उनके मुताबिक जनता अब ऐसी राजनीति चाहती है जिसमें विकास सभी वर्गों तक समान रूप से पहुंचे।
विजय शर्मा की बढ़ी राजनीतिक अहमियत
प्रदेश के गृहमंत्री विजय शर्मा का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। भाजपा के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक नितिन नबीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद से ही विजय शर्मा को राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका दिए जाने की चर्चा तेज थी।
बिहार राज्यसभा चुनाव में मिली रणनीतिक सफलता के बाद बंगाल चुनाव में भी उन्हें विशेष जिम्मेदारी दी गई थी। अमित शाह के लगातार बंगाल कैंप के दौरान विजय शर्मा को समन्वय और अभियान संचालन की अहम भूमिका सौंपी गई थी। विजय शर्मा ने चुनाव परिणाम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह जनता के निर्णय और कार्यकर्ताओं की अथक मेहनत का परिणाम है।
मतदाता सूची और ध्रुवीकरण बना बड़ा मुद्दा
इस चुनाव में निर्वाचन आयोग की कार्रवाई भी बड़े राजनीतिक विवाद का कारण बनी। लगभग 91 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने का मुद्दा चुनावी बहस के केंद्र में रहा। तृणमूल कांग्रेस ने इसे भाजपा प्रेरित कार्रवाई बताया, जबकि भाजपा ने इसे “अवैध घुसपैठियों और ब्लैक वोट्स के खिलाफ शुद्धिकरण अभियान” कहा।
मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर 24 परगना जैसे क्षेत्रों में इसका व्यापक असर देखने को मिला, जिन्हें तृणमूल का मजबूत गढ़ माना जाता था।
महिलाओं के लिए आर्थिक वादों ने बदला माहौल
भाजपा ने पश्चिम बंगाल में महिलाओं को हर महीने तीन हजार रुपये देने का वादा किया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने छत्तीसगढ़ की योजनाओं की तर्ज पर घर-घर जाकर फॉर्म भराने का अभियान भी चलाया।
इसके मुकाबले ममता बनर्जी सरकार की लक्ष्मीर भंडार योजना के तहत दी जा रही सहायता राशि को बढ़ाने का वादा किया गया था, लेकिन भाजपा का अभियान ज्यादा प्रभावी माना गया।
सत्ता विरोधी लहर और एजेंसियों की सक्रियता का असर
करीब पंद्रह वर्षों की सत्ता विरोधी लहर भी तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ दिखाई दी। चुनाव के अंतिम दौर में केंद्रीय एजेंसियों की सक्रियता बढ़ने से तृणमूल की रणनीति प्रभावित हुई।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने इस चुनाव में राष्ट्रवाद, घुसपैठ, महिला कल्याण और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को आक्रामक तरीके से उठाकर व्यापक ध्रुवीकरण किया और उसका लाभ हासिल किया।
अब घुसपैठ के मुद्दे पर भाजपा पर बढ़ेगी जिम्मेदारी
भाजपा लंबे समय से पश्चिम बंगाल में अवैध घुसपैठ का मुद्दा उठाती रही है। पार्टी लगातार राज्य सरकार को इसके लिए जिम्मेदार ठहराती रही थी। लेकिन अब जबकि राज्य और केंद्र दोनों जगह भाजपा की निर्णायक भूमिका है, ऐसे में इस मुद्दे पर जनता की अपेक्षाएं भी बढ़ गई हैं।