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Land-use rules in Chhattisgarh may soon change; a proposal has been made to restrict various activities on residential and agricultural land.
रायपुर। छत्तीसगढ़ में जमीन के इस्तेमाल को लेकर नियमों में बदलाव की तैयारी आगे बढ़ रही है। राज्य सरकार ने नए ड्राफ्ट के जरिए अलग-अलग श्रेणी की जमीन पर होने वाली गतिविधियों को स्पष्ट करने का प्रस्ताव रखा था। इस पर आम लोगों से 15 दिन के भीतर दावा-आपत्ति मांगी गई थी। तय अवधि में करीब 12 आपत्तियां सामने आई हैं।इनमें सबसे ज्यादा आपत्तियां कृषि भूमि के उपयोग से जुड़ी हैं। लोगों ने कृषि जमीन के इस्तेमाल को लेकर प्रस्तावित पाबंदियों में राहत देने की मांग की है। अब प्राप्त आपत्तियों के परीक्षण के बाद आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
प्रस्तावित नियमों में कृषि भूमि के उपयोग को लेकर कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। कृषि जमीन पर आवासीय अभिन्यास, वाणिज्यिक परिसर, बड़े व्यावसायिक प्रोजेक्ट, खतरनाक व्यावसायिक गतिविधियां और कई तरह के उद्योगों को प्रतिबंधित गतिविधियों की सूची में रखा गया है।इसके अलावा कृषि भूमि पर बड़े मॉल और अधिक घनत्व वाली आवासीय योजनाओं को भी प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव है। सरकार का उद्देश्य कृषि जमीन के अनियंत्रित व्यावसायिक और औद्योगिक इस्तेमाल को नियंत्रित करना बताया गया है।
राज्य गठन के बाद पहली बार लैंड यूज के आधार पर यह स्पष्ट करने की कोशिश की जा रही है कि किसी विशेष श्रेणी की जमीन पर कौन-कौन से निर्माण या गतिविधियां नहीं की जा सकेंगी।इसका मतलब यह होगा कि जमीन खरीदने या उसका विकास करने से पहले उसकी श्रेणी के आधार पर संभावित प्रतिबंधों की जानकारी मिल सकेगी। इससे आवासीय, वाणिज्यिक, कृषि और औद्योगिक जमीन के इस्तेमाल को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है।
प्रस्ताव के अनुसार आवासीय जमीन पर कई तरह की गतिविधियों को प्रतिबंधित किया जाएगा। इनमें उद्योग, गोदाम, कबाड़खाना, बूचड़खाना और संक्रामक रोगों के अस्पताल शामिल हैं।इसके अलावा जेल, बड़े परिवहन टर्मिनल, थोक व्यापार, तेल डिपो, पेट्रोलियम और ज्वलनशील पदार्थों का भंडारण, गैस भंडारण जैसी गतिविधियों पर भी रोक का प्रस्ताव है। पशुपालन, मछली पालन, डेयरी और पोल्ट्री फार्म के साथ दाह संस्कार स्थल, कब्रिस्तान और खनन गतिविधियों को भी इस श्रेणी में प्रतिबंधित किया गया है।
कमर्शियल जमीन के मामले में भी कई गतिविधियों पर रोक प्रस्तावित है। खतरनाक या विषाक्त रसायनों और विस्फोटक पदार्थों का भंडारण यहां नहीं किया जा सकेगा।इसके अलावा पशुपालन, मछली पालन, डेयरी, पोल्ट्री फार्म, दाह संस्कार स्थल, कब्रिस्तान और खनन गतिविधियों को भी प्रतिबंधित गतिविधियों में शामिल किया गया है।
औद्योगिक जमीन के लिए भी अलग नियम प्रस्तावित किए गए हैं। कर्मचारी आवास, छात्रावास और डॉरमेट्री जैसी जरूरतों को छोड़कर औद्योगिक क्षेत्र में सामान्य आवासीय टाउनशिप विकसित करने की अनुमति नहीं होगी।इसके साथ ही स्कूल, संक्रामक रोग अस्पताल, जेल, बड़े परिवहन टर्मिनल और थोक व्यापार जैसी गतिविधियों को भी औद्योगिक जमीन पर प्रतिबंधित रखने का प्रस्ताव है।
सरकार की ओर से मांगी गई आपत्तियों में कृषि भूमि से जुड़े मुद्दे सबसे ज्यादा सामने आए हैं। अब इन सुझावों और आपत्तियों की समीक्षा के बाद ड्राफ्ट में बदलाव या अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। इसके बाद जमीन की अलग-अलग श्रेणियों में निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर नियम और अधिक स्पष्ट हो सकेंगे।